शुक्रवार, अगस्त 19, 2022
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अखिलेश यादव और जयंत चौधरी की जोड़ी हुई फेल, जाटों को नही कर पाये अपने पक्ष में, ये रहे प्रमुख कारण  

कल आये उत्तरप्रदेश चुनावों के नतीजों ने ये साफ़ कर दिया है की सपा और आरएलडी का गठबंधन बीजेपी के सामने कुछ बड़ा नही कर पाया. ऐसा माना जा रहा था की जाट बहुल्य पश्चिमी उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी और आरएलडी का गठबंधन बीजेपी को सत्ता में आने से रोक लेगा. लेकिन चुनावी परिणामों ने सब कुछ बदल दिया है.

किसान आंदोलन का प्रमुख गढ़ रहे पश्चिमी UP में बीजेपी का राह आसान नही मानी जा रही थी, और कई राजनीतिक पंडित ये अनुमान लगा रहे थे की सपा और आरएलडी के गठबंधन करने से जाट और मुस्लिम वोट का ध्रुवीकरण हो जाएगा. लेकिन इन सबके बावजूद भी बीजेपी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य में फिर से सरकार बना ली है.

दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन होने के बावजूद भी चुनाव में पिछड़ने का प्रमुख कारण प्रत्यासियों का गलत चयन और सीटों का बटवारा है.

सपा-आरएलडी के गठबंधन के फ़ैल होने का कारण ये है की, समाजवादी पार्टी ने आरएलडी के प्रत्यासीओ को गोद लिया और कुछ को सपा के चुनाव चिन्ह पर चुनाव में उतार दिया. और इस कारण उन लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गयी जो समाजवादी पार्टी को पसंद नही करते थे.

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पश्चिमी यूपी के जाटों ने उन सीटों पर ही वोट किया जहाँ पर जयंत चौधरी की पार्टी के उम्मीदवार खड़े हुए थे, और उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकेट पर चुनाव लड़ रह आरएलडी के उम्मीदवारों को भी वोट नही किया.

इसके साथ ही एक अन्य कारण ये भी है की जाटों को मुजफ्फरनगर दंगो की याद दिलाकर समाजवादी पार्टी के खिलाफ खड़ा कर दिया. इस मुद्दे को बीजेपी के नेताओं ने बार-बार उठाया, जिससे जाटों को इस बारे में याद दिलाया की समाजवादी पार्टी ने उनके साथ क्या किया था.

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जयंत चौधरी के लिए ये चुनाव काफी बड़ा था क्योकि उनके पिता अजित सिंह की मौत के बाद वो पहली बार किसी चुनाव में शामिल हो रहे थे. इसलिए जयंत चौधरी के ऊपर ये बड़ा दायित्व था की उनकी पार्टी इस चुनाव में बड़ा असर छोड़े.

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