मंगलवार, अगस्त 16, 2022
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एकनाथ शिंदे का बड़ा दांव : नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन, उद्धव ठाकरे पार्टी में बनाया अध्‍यक्ष

नई दिल्ली। महाराष्ट्र की सत्ता पर काबिज होने के बाद अब एकनाथ शिंदे शिवसेना पर कब्जे की जंग में कूद गए हैं। उद्धव ठाकरे से शिवसेना की बागडोर छीनने के लिए शिंदे ने पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी भंग कर नई कार्यकारिणी का गठन किया। शिंदे समर्थक विधायकों ने एकनाथ शिंदे को पार्टी का मुख्य नेता चुना और उद्धव ठाकरे को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। वहीं एकनाथ शिंदे, उद्धव ठाकरे को एक और झटका दे सकते हैं। माना जा रहा है कि शिवसेना के 18 लोकसभा सांसदों में से 12 सांसद शिंदे गुट को अपना समर्थन दे सकते हैं। एकनाथ शिंदे दिल्ली में हैं और वह सांसदों के साथ लोकसभा स्पीकर से मुलाकात कर सकते हैं।

शिंदे ने बनाई शिवसेना की नई टीम

शिवसेना की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में आदित्य ठाकरे, मनोहर जोशी, लीलाधर डाके, दिवाकर रावते, सुधीर जोशी संजय राव, सुभाष देसाई, रामदास कदम, गजानन कीर्तिकर, आनंद गीते, आनंदराव अडसूल, आनंद राव व एकनाथ शिंदे शामिल थे। शिंदे ने सोमवार को इस कार्यकारिणी की भंग कर अपनी ओर से नई कार्यकारिणी का ऐलान कर दिया। इसमें रामदास कदम और आनंद राव अडसुल को फिर से नेता के तौर पर नियुक्त किया। उप नेता के तौर पर यशवंत जाधव, गुलाबराव पाटिल, उदय सामंत, तानाजी सावंत, शिवाजीराव पाटिल, विजय नाहटा और शरद पोंसे को नियुक्ति दी गई जबकि दीपक केसरकर को नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का प्रवक्ता बनाया गया है। शिंदे ने शिवसेना की नई कार्यकारिणी से उद्धव के करीबी नेताओं की छुट्टी कर अपने करीबी नेताओं को नियुक्त किया है। पुरानी राष्ट्रीय कार्यकारणी से महज दो नेताओं को लिया गया है, जो उद्धव खेमा छोड़कर सोमवार को उनके साथ आए थे। वहीं शिंदे गुट के एक नेता ने कहा, ‘उद्धव ठाकरे जी को पार्टी प्रमुख और शिंदे को मुख्य नेता के रूप में नामित करने का निर्णय वास्तविक शिवसेना को नियंत्रित करने वाले दोनों के बीच कानूनी लड़ाई को देखते हुए किया गया है।’ यह इशारा करता है कि शिंदे खेमा अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है और इस बात पर जोर दे रहा है कि वह शिवसेना से अलग नहीं हुआ है, बल्कि पार्टी के ‘सच्चे’ चेहरे का प्रतिनिधित्व करता है।

उद्धव ठाकरे को एक और झटका दे सकते हैं शिंदे

शिंदे गुट के नेताओं के अनुसार नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन के बाद शिंदे गुट चुनाव आयोग से मिलकर अपने गुट को असली शिवसेना के रूप में दावा कर सकता है। वहीं जिन नेताओं को शिंदे गुट ने अपनी कार्यकारिणी में रखा है, उन्हें उद्धव ठाकरे ने पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि शिंदे गुट के कार्यकारिणी की कोई वैधानिक मान्यता नहीं है।

वहीं उद्धव ठाकरे ने शिवसेना को फिर से मजबूत करने का काम शुरू कर दिया है और इसी कड़ी में उन्होंने कई बागी नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया। साथ ही मुंबई, नवी मुंबई, पालघर समेत अन्य जिलों में उद्धव ठाकरे ने 100 से अधिक पदाधिकारियों की नियुक्ति की। बैठक के बाद शिंदे गुट ने शिवसेना की नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया और उद्धव ठाकरे द्वारा गठित पूर्व कार्यकारिणी को भंग करने की भी घोषणा की। उद्धव ठाकरे द्वारा बर्खास्त किए जाने के बाद शिंदे गुट ने विधायक दीपक केसरकर को प्रवक्ता के रूप में नियुक्त किया और रामदास कदम और पूर्व सांसद आनंदराव अडसुल को शिवसेना पार्टी के नेता के रूप में नियुक्त किया। रामदास कदम ने सोमवार को अपना इस्तीफा मातोश्री भेजा था।

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