शुक्रवार, अगस्त 19, 2022
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Udaipur Murder Case : ‘समझौता’ हो गया कहकर नहीं दी थी पुलिस ने सुरक्षा, 15 जून को हुई सबसे बड़ी गलती

जयपुर। राजस्थान के उदयपुर में टेलर कन्हैयालाल साहू (Udaipur tailor Kanhaiya Lal Sahu Murder) की निर्मम हत्या ने पूरे देश को सन्न कर दिया है। नूपुर शर्मा (Nupur Sharma) के समर्थन में एक पोस्ट की वजह से कट्टरपंथियों ने इस्लामिक स्टेट के आतंकियों की तर्ज पर कन्हैया की गर्दन काट डाली। उदयपुर में जघन्य हत्या के बाद पूरे शहर में जगह-जगह पुलिस तैनात कर दी गई है। सात थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। वहीं पूरे राजस्थान में 24 घंटे के लिए इंटरनेट बंद है। कन्हैयालाल साहू के मर्डर पर राजस्थान पुलिस भी सवालों के घेरे में आ गई है। खुद गहलोत सरकार भी पुलिस महकमे से चूक को स्वीकार कर रही है। लेकिन अभी सिर्फ एएसआई को सस्पेंड किया गया है।

कन्हैया को गिरफ्तार करने में तो चुस्त थी पुलिस

दरअसल नूपुर शर्मा को लेकर कन्हैयालाल के फोन से गलती से हुई पोस्ट को लेकर कुछ लोगों ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत पर त्वरित ऐक्शन लेते हुए उदयपुर पुलिस ने कन्हैयालाल को गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, बाद में उसे कोर्ट से जमानत मिल गई।

कन्हैयालाल के खिलाफ दर्ज हुई थी शिकायत

उन लोगों के जाने के बाद 11 जून को धानमंडी थाने से फोन आया कि आपके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई है। आप थाने आ जाओ। कन्हैयालाल को पुलिस ने गिरफ्तार कर उसी दिन समझौता करा दिया था। एएसआई भंवरलाल की अगुवाई में दोनों पक्षों में बातचीत कराई गई थी। इसके बाद भी कन्हैया को कट्टरपंथियों से धमकियां मिलने लगीं। उसे अलग-अलग नंबरों से फोन और मैसेज के जरिए जान से मारने की धमकी दी जाने लगी। खुद की जान पर खतरे को देखते हुए कन्हैया 15 जून को उसी थाने में शिकायत और गुहार लेकर पहुंचा, जहां की पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया था। उसने धमकियों की जानकारी देते हुए अपनी जान की रक्षा की गुहार लगाते हुए सुरक्षा की मांग की।

कन्हैयालाल ने यह लिखा था अर्जी में

करीब छह दिन पहले मेरे बेटे से मोबाइल पर गेम खेलते हुए कुछ पोस्ट हो गया था। इसकी जानकारी मुझे नहीं थी। पोस्ट व डीपी लगाने के दो दिन बाद दो लोग मेरी दुकान पर आए। मोबाइल की मांग की। बोले- आपके मोबाइल से आपत्तिजनक पोस्ट डाली गई है। मैंने कहा कि मुझे मोबाइल चलाना नहीं आता है। मोबाइल से मेरा बच्चा गेम खेलता है। उसी से हो गया होगा। इसके बाद पोस्ट भी डिलीट कर दी गई थी। उनलोगों ने कहा कि आइंदा से ऐसा मत करना। कन्हैयालाल से कहा कि मामले का समझौता हो गया है। इस वजह से घबराने की जरूरत नहीं है। कुछ नहीं होगा। इस पर भरोसा कर कन्हैयालाल ने दुकान खोली थी। भंवरलाल को मंगलवार को सस्पेंड कर दिया गया है। एक अन्य पुलिसकर्मी की भूमिका की जांच चल रही है।

पुलिस ने कर दी गलती

कन्हैया को गिरफ्तार करने में देर ना करने वाली पुलिस ने धमकी देने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने या गिरफ्तारी की कोई जरूरत नहीं समझी। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ इतना किया कि कुछ लोगों को थाने में बुलाकर समझा-बुझा दिया और शांति-मेल मिलाप से रहने का उपदेश देकर घर भेज दिया। पुलिस मामले की संवेदनशीलता क्यों नहीं समझ पाई? सिर कलम करने की धमकी को इतने हल्के में क्यों लिया गया? क्यों नहीं समय रहते आरोपियों को गिरफ्तार किया गया? राजस्थान पुलिस पर हर कोई इस तरह के सवाल उठा रहा है और कहा जा रहा है कि पुलिस ने यदि धमकी देने वालों को गिरफ्तार कर लिया होता तो आज शायद कन्हैयालाल जिंदा होता।

यह भी पढ़ें :- उदयपुर में तालिबानी हत्या: राजस्थान में इंटरनेट बैन, शहर में कर्फ्यू, तनाव में गुजरी पूरी रात
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