गुरूवार, दिसम्बर 1, 2022
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राजस्थान का ऐसा किला जहां हैं भूत-प्रेतों का साया!, सूर्यास्त के बाद अंदर जाना है मना

दुनियाभर में किलों को लेकर मशहूर राजस्थान में बहुत से ऐसे स्थान हैं जहां बुरी आत्माओं ने अपना कब्जा जमा रखा है। इतिहास के पन्नों को पलटें तो ये वही स्थान हैं जो एक समय पहले काफी खुशहाल हुआ करते थे लेकिन एक बुरी नजर की वजह से वह स्थान आज श्रापित हो गए हैं। जहां पहले वहां चारों ओर खुशहाली हुआ करती थी आज वह स्थान अंधेरों के बीच कहीं खो गया है। ऐसा ही एक स्थान है भानगढ का किला जो अपनी भूतहा कहानियों को लेकर काफी चर्चाओं में है। शायद बहुत ही कम लोग यह जानते होंगे कि यह कहानियां नहीं बल्कि एक ऐसी खतरनाक सच्चाई है जिससे आज तक पीछा नहीं छुडवाया जा सका है।

राजस्थान के अलवर जिले की अरावली पर्वतमाला में स्थित भानगढ़ पहाड़ियों पर ढलान वाले इलाके में तल पर स्थित है। यह किला सुंदर वास्तुकला, मंदिर, और उद्यान से सज्जित है, लेकिन अब ये एक खंडहर में तब्दील हो चुका है, जो देखने में काफी भयानक लगता है। यह किला अपनी बनावट की वजह से कम और अपने भूतिया किस्सों की वजह से ज्यादा चर्चा में रहता है। यहां पर किले के भीतर स्थानीय लोगों और पर्यटकों को भी कई अजीब अनुभव हुए हैं, यहां पर लोगों का कहना है कि किले के भीतर कुछ संदिग्ध घटनाएं महसूस की गई हैं। इस किले को लेकर कई कहानियां भी प्रचलित हैं। इस किले के पास के लोग भी किले के पास जाने के कतराते हैं।

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सत्रहवीं शताब्दी में राजा सवाई मान सिंह के छोटे भाई राजा माधो सिंह ने भानगढ किले का निर्माण करवाया था और किले के चारों ओर पहाडों की खूबसूरती है। इस किले के निर्माण में बेहतरीन शिल्पकलाओं का भी प्रयोग किया गया है और साथ ही इस किले में हिंदू देवी-देवताओं के भी मंदिरों का भी निर्माण किया गया है। भानगढ किले का निर्माण बेहद मजबूत पत्थरों से किया गया था जो आज भी जस के तस स्थित हैं। लेकिन इस खूबसूरत भानगढ किले की एक भयानक सच्चाई इसके अंदर कैद है और वह है एक तांत्रिक का श्राप, जिसकी वजह से आज भी इस किले में शाम ढलते ही रूहों और आत्माओं की आवाज आने लगती है।

एक श्राप ने उजाड़ दी भानगढ़ की खुशियां

कहते हैं भानगढ की राजकुमारी रत्नावती बहुत खूबसूरत थी। आसपास के राज्यों के सभी राजकुमार उससे विवाह करना चाहते थे लेकिन रत्नावती को कोई भी पसंद नहीं आता था। लेकिन उसी राज्य में रहने वाला सिंघिया, जो काले जादू का ज्ञाता था कि नजर भी रत्नावती पर थी। वह रानी रत्नावती के रूप का दीवाना था और उससे विवाह करना चाहता था लेकिन रत्नावती ने कभी उसे पलटकर नहीं देखा था। जिस दुकान से रानी रत्नावती के लिए इत्र जाता था उसने उस दुकान में जाकर रत्नावती को भेजे जाने वाली इत्र की बोतल पर काला जादू कर उस पर वशीकरण मंत्र का प्रयोग किया। लेकिन अपने इस काले जादू का असर सिंघिया पर पलट गया और एक भारी-भरकम पत्थर के नीचे आने से काले जादूगर सिंघिया की जान चली गई। लेकिन मरते-मरते उसने राजकुमारी समेत पूरे भानगढ को यह श्राप दिया कि इस महल और भानगढ में रहने वाले सभी लोग मर जाएंगे और वह फिर कभी जन्म भी नहीं ले पाएंगे, उनकी आत्मा हमेशा इसी स्थान पर कैद रहेंगी। सिंघिया की मौत के कुछ ही दिनों बाद भानगढ और अजबगढ के बीच कत्लेआम हुआ जिसमें राजकुमारी रत्नावती समेत सभी भानगढ वासियों की मौत हो गई।

रात को किले से आती हैं अजीबोगरीब आवाजें!

रात को इस किले में जाना पूरी तरह निषेध है। लेकिन जिन-जिन लोगों ने वहां मौजूद आत्माओं की पडताल करने की कोशिश की उनका कहना था कि रात के समय वहां औरतों की चीखें और सैनिकों के चलने की आवाजें आती हैं। पूरी रात वहां शोर-शराबा होता रहता है और खतरनाक आवाजें आती रहती हैं।

वैसे तो हम किसी भी तरह के अंधविश्वास के बढ़ावा नहीं देते हैं और न ही किसी भी बात की कोई पुष्टि नहीं करते हैं। ये सिर्फ लोक प्रचलित मान्यताओं का कहना है। अगर आप किले घूमने के शौकिन हैं तो यहां पर दिन के समय घूम सकते हैं। यह अभी भी लोगों के घूमने के लिए खुला हुआ है।

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