शुक्रवार, दिसम्बर 9, 2022
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दुनिया 8 अरब होने के करीब : इस वर्ष तक जनसंख्या में चीन को पीछे छोड़ देगा भारत

World Population Day 2022: पूरी दुनिया में 11 जुलाई को जनसंख्या दिवस के रूप में मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने सोमवार को विश्व जनसंख्या दिवस 2022 के मौके पर भारत को लेकर चौंकाने वाली रिपोर्ट दी है। संयुक्त राष्ट्र का अनुमान है कि 2023 में भारत दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा। अभी चीन सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है और भारत अगले साल उसे पछाड़ देगा। संयुक्त राष्ट्र का मानना है कि नवंबर 2022 के मध्य तक दुनिया की आबादी 8 अरब तक पहुंच जाएगी। 1950 के बाद से वैश्विक जनसंख्या सबसे धीमी गति से बढ़ रही है। 2020 में जनसंख्या वृद्धि दर एक प्रतिशत से कम हो गई है। संयुक्त राष्ट्र के ताजा अनुमानों के अनुसार दुनिया की जनसंख्या 2030 में लगभग 8.5 अरब और 2050 में 9.7 अरब हो जाएगी। 2080 तक इसके लगभग 10.4 अरब के शिखर तक पहुंचने का अनुमान है। वहीं वर्ल्‍ड इकोनॉमिक फोरम की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस सदी के अंत तक भारत और चीन दोनों देशों की आबादी में काफी गिरावट आएगी। साल 2100 में भारत की आबादी 1.09 अरब होगी। चीन तीसरे स्थान पर होगा। वहीं नाइजीरिया की आबादी विश्व में दूसरे स्थान पर होगी।

11 जुलाई को क्यों मनाया जाता है जनसंख्या दिवस

पूरी दुनिया में 11 जुलाई को जनसंख्या दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह सिलसिला साल 1990 से लगातार चला आ रहा है। वर्ष 1989 में यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम (UNDP) की गवर्निंग काउंसिल ने 11 जुलाई की तारीख को विश्व जनसंख्या दिवस के तौर पर मनाने का फैसला किया था। इसके बाद से ही हर साल इस दिवस को मनाया जाता है। पहले साल इस दिवस को 90 देशों द्वारा पहली मनाया गया था।

क्या है जनसंख्या दिवस के पीछे का कारण?

दरअसल, साल 1987 में दुनिया की आबादी 5 अरब के आंकड़े को पार कर गई थी। ऐसे में अब जरूरत थी कि बढ़ती जनसंख्या और हमारी धरती के पर्यावरण और विकास पर इसका असर क्या होगा, इसपर भी ध्यान दिया जाए। इसी मामले पर पूरी दुनिया को जागरूक करने के लिए जनसंख्या दिवस को मनाने की शुरुआत की गई थी। इस साल इस कार्यक्रम की थीम है- 8 अरब की दुनिया: सभी के लिए एक लचीले भविष्य की ओर – अवसरों का दोहन और सभी के लिए अधिकार और विकल्प सुनिश्चित करना।

अभी कितनी है दुनिया की जनसंख्या

यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड के मुताबिक वर्तमान में दुनिया में इंसानों की कुल आबादी करीब 7.95 अरब है। कुछ ही महीने में यह 8 अरब के आंकड़े को पार कर जाएगी। दुनिया की आबादी का सबसे बड़ा हिस्सा एशिया में निवास करता है। दुनिया के करीब 60 फीसदी लोग इसी महाद्वीप में हैं। दुनिया के सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश चीन और भारत हैं।

चीन से कितना पीछे भारत?

यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड के आकड़ों के मुताबिक भारत की जनसंख्या वर्तमान में 1.40 अरब के करीब है। वहीं, चीन की जनसंख्या 1.44 अरब है। अनुमान के मुताबिक साल 2023 तक भारत चीन को पीछे छोड़कर दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन जाएगा। ऐसा इसलिए है कि वर्तमान में चीन की प्रजनन दर 1.7 है। वहीं, इसके मुकाबले भारत में प्रजनन दर अब भी 2 से ऊपर है।

जनसंख्या समस्या है या समाधान?

विभिन्न देशों में जनसंख्या के अपने-अपने मायने हैं। कम जनसंख्या वाले देशों में आपको सुख-सुविधाएं और विकास ज्यादा देखने को मिलता है। वहीं, भारत और चीन जैसी बड़ी जनसंख्या वाले देश अब भी विकासशील बने हुए हैं। एक तरफ चीन, रूस और कई अन्य देश अब प्रजनन दर को बढ़ावा दे रहे हैं तो वहीं भारत में संसाधनों की कमी और जनसंख्या की बहुलता को भी दरकिनर नहीं किया जा सकता है। अधिक आबादी को सही दिशा देकर देश का विकास तो किया जा सकता है लेकिन पर्यावरण पर पड़ने वाले इसके दुष्प्रभावों को भी दरकिनार नही किया जा सकता।

क्या है बढ़ती जनसंख्या के कारण?

बढ़ती जनसंख्या का सबसे मुख्य कारण प्रजनन दर में बढ़ोतरी और मृत्यु दर में कमी को कहा जा सकता है। अगर बात वर्ष 1900 की करें तो उस वक्त दुनिया की आबादी 2 अरब से कम थी। इसके मुकाबले 122 वर्षों में ही आबादी 4 गुणा अधिक हो गई है। वर्तमान की पीढ़ी को इतिहास से सबसे बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं आदि उपलब्ध हो रही हैं। दुनिया में प्रजनन दर पहले के मुकाबले भले ही कम हुई हो लेकिन अब भी कई देशों में ये काफी ज्यादा है। इसका कारण शिक्षा और जागरूकता की कमी है।

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