बुधवार, अगस्त 10, 2022
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Temple Bells : मंदिर में क्यों बजाई जाती है घंटी? जानिए धार्मिक और वैज्ञानिक कारण

हिंदुत्व शब्द सुनते ही हमारे कानों में एक आवाज गूंजती है-मंदिरों से घंटियों की आवाज। पूजा करते वक्त घंटी जरूर बजानी चाहिए। प्राचीन शास्त्रों के अनुसार, घंटी का उपयोग बुरी ताकतों को दूर रखने के लिए ध्वनि देने के लिए किया जाता है। ऐसा मानना है कि इससे ईश्वर जागते हैं और आपकी प्रार्थना सुनते हैं। लेकिन हम आपको यहां बता रहे हैं कि घंटी बजाने का सिर्फ भगवान से ही कनेक्शन नहीं है, बल्कि इसका साइंटिफिक असर भी होता है। यही वजह है कि घंटी हमेशा मंदिर के प्रवेश स्थान पर लगाई जाती है।

घंटी बजाने के पीछे का वैज्ञानिक कारण

मंदिर घर का हो या किसी धार्मिक स्थल का। वहां घंटी तो होती ही है। इसके पीछे धार्मिक कारण तो हैं ही साथ में इसका हमारे जीवन पर साइंटिफिक असर भी होता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि जब घंटी बजाई जाती है, तो वातावरण में कंपन पैदा होता है, जो वायुमंडल के कारण काफी दूर तक जाता है। इस कंपन का फायदा यह है कि इसके क्षेत्र में आने वाले सभी जीवाणु, विषाणु और सूक्ष्म जीव आदि नष्ट हो जाते हैं, जिससे आसपास का वातावरण शुद्ध हो जाता है।

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दरअसल, मंदिर की घंटियां कैडमियम, कॉपर, जिंक, निकेल, लेड, क्रोमियम और मैंगनीज जैसी विभिन्न धातुओं के मिश्रण से बनी होती हैं। इन धातुओं के मिश्रण से घंटी बनाना ही काफी नहीं है। वास्तविक विज्ञान उस स्थिती में निहित है जिस पर इन धातुओं में से प्रत्येक का उपयोग घंटी बनाने में किया जाता है। इन घंटियों को इस तरह से बनाया गया है कि जब ये ध्वनि उत्पन्न करती हैं तो यह हमारे दिमाग के बाएं और दाएं हिस्सों में एकता पैदा करती हैं। जैसे ही हम घंटी बजाते हैं, यह एक तेज और स्थायी ध्वनि उत्पन्न करती है जो पर्यावरण मोड में कम से कम 7 सेकंड तक चलती है। प्रतिध्वनि की अवधि हमारे शरीर के सभी सात उपचार केंद्रों (योग में परिभाषित 7 चक्र) को सक्रिय करने के लिए पर्याप्त है। यह हमारे मस्तिष्क को हमारे सभी विचारों से खाली कर देता है और हमें एक बहुत तेज स्थिति में प्रवेश करने में मदद करता है जहां हम एकाग्रता का एक अच्छा स्तर प्राप्त कर सकते हैं। यही कारण है कि जिन जगहों पर घंटी बजने की आवाज नियमित आती रहती है, वहां का वातावरण हमेशा शुद्ध और पवित्र बना रहता है। इसी वजह से लोग अपने दरवाजों और खिड़कियों पर भी विंड चाइम्स लगवाते हैं, ताकि उसकी ध्वनि से नकारात्मक शक्तियां हटती रहें। नकारात्मकता हटने से समृद्धि के द्वार खुलते हैं।

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घंटी बजाने के ये फायदे भी हैं

घंटी बजाने से देवताओं के समक्ष आपकी हाजिरी लग जाती है। मान्यता अनुसार घंटी बजाने से मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं की मूर्तियों में चेतना जागृत होती है जिसके बाद उनकी पूजा और आराधना अधिक फलदायक और प्रभावशाली बन जाती है। घंटी की मनमोहक एवं कर्णप्रिय ध्वनि मन-मस्तिष्क को अध्यात्म भाव की ओर ले जाने का सामर्थ्य रखती है। मन घंटी की लय से जुड़कर शांति का अनुभव करता है। मंदिर में घंटी बजाने से मानव के कई जन्मों के पाप तक नष्ट हो जाते हैं। सुबह और शाम जब भी मंदिर में पूजा या आरती होती है तो एक लय और विशेष धुन के साथ घंटियां बजाई जाती हैं जिससे वहां मौजूद लोगों को शांति और दैवीय उपस्थिति की अनुभूति होती है।

ये भी है मान्यता

जब सृष्टि का प्रारंभ हुआ, तब जो नाद (आवाज) गूंजी थी। वही आवाज घंटी बजाने पर भी आती है। घंटी उसी नाद का प्रतीक है। यही नाद ओंकार के उच्चारण से भी जागृत होता है। कहीं-कहीं यह भी लिखित है कि जब प्रलय आएगा उस समय भी ऐसा ही नाद गूंजेगा। मंदिर के बाहर लगी घंटी या घंटे को काल का प्रतीक भी माना गया है।

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