शुक्रवार, सितम्बर 30, 2022
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भारत के नए उपराष्ट्रपति की दिलचस्प कहानी : जगदीप धनकड़ ने IIT, NDA और IAS छोड़ वकालत चुना

नई दिल्ली। देश को अपना 14 वां उपराष्ट्रपति मिल गया है। पश्चिम बंगाल के राज्यपाल रहे जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) देश के नए उप-राष्ट्रपति होंगे। NDA उम्मीदवार जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) ने उपराष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है। उन्‍होंने यूपीए की उम्‍मीदवार मार्गरेट अल्‍वा को हराया है। अब वे 11 अगस्त को राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण करेंगे। इस चुनाव में 725 सांसदों ने वोटिंग की थी। भाजपा के सनी देओल और संजय धोत्तरे ने वोट नहीं डाला। वे बीमारी के चलते संसद नही आ पाए। वहीं इस चुनाव में करीब 90 प्रतिशत वोट डाले गए। चुनाव में जगदीप धनखड़ को 528 वोट मिले, जबकि अल्वा को महज 182 वोट प्राप्त हुए और 15 वोटों को अमान्य माना गया।

जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति बनने के बाद उनके गृह जनपद झुंझुनू में जश्न का माहौल है। परिवार के लोग एक दूसरे को लड्डू खिलाकर खुशी मनाई और लोक गीतों पर जमकर थिरकते दिखाई दिए। जीत की घोषणा के साथ ही लोगों ने पटाखे जलाकर आतिशबाजी की और डीजे की धुन पर थिरकते हुए खुशी का इजहार किया। महिलाएं भी काफी जोश खरोश के साथ लोकगीत और पारंपरिक गीतों पर डांस करते हुए दिखाई दीं।

जगदीप धनखड़ देश के 14 वें उपराष्ट्रपति के रूप में 11 अगस्त से अपना कार्यभार संभालेंगे। वहीं 10 अगस्त को मौजूदा उपराष्ट्रपति एम.वैकैया नायडू का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। लेकिन क्या आपको पता है कि एक सैनिक स्कूल का छात्र आज देश के उपराष्ट्रपति के पद पर बैठने तक का सफर कैसा रहा? तो यहां हम आपको बताते हैं कि जगदीप धनखड़ के सफलता के रास्ते में कितने उतार-चढ़ाव आए।

जगदीप धनखड़ ने IIT, NDA और IAS छोड़ वकालत चुना

जगदीप धनखड़ एक मेधावी छात्र रहे हैं। उनका चयन आईआईटी, एनडीए और फिर आईएएस के लिए हुआ। हालांकि उन्‍होंने वकालत को अपना पेशा बनाया। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से LLB की और फिर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकालत की। देश के नामी वकीलों में उनकी गिनती रही है।

सैनिक स्कूल में ली शिक्षा, उच्च न्यायालयों में की वकालत

जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) का जन्म 18 मई 1951 में राजस्थान (Rajasthan) के झुंझुनूं के किठाना गांव में हुआ था। इन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा किठाना में ही पूरी की। साल 1962 में इन्होंने चित्तौड़गढ़ (Chittorgarh) के सैनिक स्कूल में प्रवेश लिया। आगे की शिक्षा धनखड़ ने यहीं से पूरी की। धनखड़ ने जयपुर के महाराजा कॉलेज से स्नातक किया। उन्होंने 1979 में राजस्थान यूनिवर्सिटी से एलएलबी किया। जगदीप धनखड़ ने 1979 से राजस्थान बार काउंसिल में वकील के रूप में अपनी शुरुआत की। इसके 3 साल बाद ही वे हाईकोर्ट के लिए नामित हुए। साल 1987 में वे सबसे कम उम्र में राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने गए। साल 1990 से धनखड़ ने सर्वोच्च न्यायालय में प्रेक्टिस करना शुरू किया। उन्होंने देश के कई हाइकोर्ट में वकालत की है।

जगदीप धनखड़ का राजनीतिक सफर

साल 1989 में धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) ने सियासत में कदम रखा और जनता दल के टिकट पर झुंझुनूं (Jhunjhunu) से रिकॉर्ड वोटों से जीतकर संसद पहुंचे। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस का हाथ थाम लिया और अजमेर से वो कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़े हालांकि इस चुनाव में उन्हें शिकस्त झेलनी पड़ी। इसके बाद साल 2003 में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया और अजमेर के किशनगंज से विधायक चुने गए। वे केंद्रीय मंत्री रहते हुए यूरोपीय संसद में से एक संसदीय समूह के उपनेता भी रहे थे। जगदीप धनखड़ साल 2019 में प. बंगाल के राज्यपाल के रूप में नियुक्त हुए।

दोनों सदनों में राज्य का वर्चस्व

धनखड़ अब उपराष्ट्रपति चुनाव जीत गए हैं। अब वे 11 अगस्त को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। वे राज्यसभा के सभापति भी होंगे। राजस्थान के ओम बिरला (Om Birla) वर्तमान में लोकसभा के अध्यक्ष हैं। इस तरह संसद के दोनों सदनों के शीर्ष संवैधानिक पदों पर राजस्थान का वर्चस्व होगा।

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