शुक्रवार, दिसम्बर 9, 2022
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सरकार ये कैसा इंसाफ! नौकरी के लिए कर रहे पैदल मार्च: लड़कियों को उठा ले गई पुलिस, अधिकारियों ने मारे थप्पड़, 6 साथी गायब

नई दिल्ली। बचपन से हमने एक ही सपना देखा कि देश के लिए कुछ करेंगे। इसी ख्वाहिश को लेकर सेना मे भर्ती होने के लिए लाखों युवाओं ने एसएससी जीडी 2018 में आवेदन किया। लेकिन इसी ख्वाहिश को सैकड़ों युवाओं को अपने ही देश में बेगाना कर दिया। अपने हक की लड़ाई लड़ते-लड़ते युवा मेंटली और फिजिकल दोनों ही तरह से डिस्टर्ब हो चुके हैं। पैरों में छाले पड़ गए हैं। शरीर का हर एक हिस्सा दर्द से कराह रहा है। उनका ये दर्द कोई सुनने वाला भी नहीं हैं। ये दर्दभरी दास्तां एसएससी जीडी 2018 के तहत पैरा मिलिट्री फोर्सेज के लिए लिखित फिजिकल और मेडिकल टेस्ट पास कर चुके अभ्यर्थियों की हैं। जो नियुक्ति पत्र देने की मांग को लेकर 62 दिनों से पदयात्रा पर हैं। इन अभ्यर्थियों में 35 लड़कियों समेत 160 अभ्यर्थी नियुक्ति पत्र की मांग कर रहे हैं। एक जून से महाराष्ट्र के नागपुर से हाथों में तिरंगा लिए छात्र राजधानी दिल्ली पहुंच रहे हैं। तेज गर्मी, कड़ी धूप, जंगल-पहाड़, बारिश पथरीला रास्ता और प्रशासन की बदसलूकी जैसी तमाम परेशानियां सहते हुए ये बेरोजगार 27 जुलाई को हरियाणा के पलवल पहुंचे। पुलिस ने इन सभी लोगों को पहले तीन दिन तक रोककर परेशान किया। इन्हें 1 अगस्त देर रात जबरन बस में ठूंसकर आगरा ले जाया गया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने लड़कियों से बदसलूकी भी की।

नागपुर से दिल्ली पैदल मार्च निकाल रहे बेरोजगारों में से एक युवा छात्र ने रात 12:25 बजे मीडिया से संपर्क किया। इस दौरान युवा छात्र समेत उनके सभी साथी काफी डरे हुए थे। इस दौरान छात्र ने व्हाट्सएप मैसेज पर लाइव लोकेशन शेयर की और मैसेज में लिखा, ‘अभी हम बस में हैं। हम लोगों को कहां ले जाया जा रहा है, ये हमें नहीं पता।’

पुलिस के साथ गए छह साथियों से नहीं हो पा रहा संपर्क

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, छात्र ने बताया- ‘हम सभी 27 जुलाई को पलवल पहुंच गए थे। पलवल पुलिस हमारे छह साथियों- पश्चिम बंगाल की काजल, छत्तीसगढ़ की अमिता, महाराष्ट्र के विशाल लांडगे और कडूबा राठौड़, ओडिशा के भीष्मराज, और असम के सुसैन टॉय को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कराने के लिए लेकर गई थी, लेकिन उसके बाद से इन लोगों से हमारा संपर्क नहीं हो पा रहा है। हम सबने पुलिस से हजारों दफा उन लोगों के बारे में पूछा। एक बार बात कराने के लिए मिन्नतें की, लेकिन पुलिस ने हमारे साथियों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी।’

छात्र ने बताया कि सोमवार यानी एक अगस्त की देर रात हम सबको जबरन बस में ठूंसा गया और फिर हम लोगों को युमना एक्सप्रेस वे से आगरा की ओर ले जाया जा रहा है। हम सभी अपने 6 साथियों को लेकर चिंतित हैं। बस में चढ़ने के दौरान भी हमने पुलिस अधिकारियों से बात कराने की गुजारिश की। उनसे ये भी कहा कि हमारे साथियों को वापस हमारे पास भेज दीजिए, उसके बाद हम लोग लौट जाएंगे। इसके बावजूद उन लोगों ने हमारे साथियों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। हम सब डरे हुए हैं। दो लड़कियों समेत अपने छह साथियों के लिए फिक्रमंद हैं।

पुलिस ने लड़कियों पर उठाया हाथ, उनका रवैया हमे डराने लायक

छात्र के मुताबिक, ‘हम लोगों ने खाना पीना छोड़ दिया। धरने पर बैठ गए कि जब तक हमारे साथियों से बात नहीं कराई जाएगी, तब तक हम यहां से न हिलेंगे और न कुछ खाएंगे-पिएंगे। पुलिस ने डरा-धमकाकर खाना खिलाने के लिए जबरदस्ती की। 62वें दिन पुलिस ने हमारे सभी साथियों को गिरफ्तार कर पलवल से 7 किलोमीटर दूर तिंवरी रॉयल पैलेस में रखा। यहां पुलिस अधिकारियों ने हम सबको धरा-धमकाकर खिलाने की कोशिश की। जब लड़कियों ने खाना खाने से मना किया तो अधिकारी उन पर हाथ उठाने से भी नहीं हिचके।’

क्यों निकाला जा रहा है पैदल मार्च

मार्च का नेतृत्व करने वाले विशाल ने बताया था कि साल 2018 में एसएससी जीडी के तहत पैरा मिलिट्री फोर्स में 60,210 पद के लिए भर्ती निकाली गई थी। हम लोगों ने लिखित, फिजिकल और मेडिकल टेस्ट पास किया, लेकिन हमें नियुक्ति पत्र नहीं मिला। सरकार ने सिर्फ 55 हजार पद ही भरे। इसको लेकर फरवरी, 2021 से हम लोगों ने दिल्ली में प्रदर्शन शुरू किया। हम लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मिलना चाहते थे, लेकिन उनसे मिलने का टाइम नहीं मिला। हमारे साथी दिल्ली में सभी सांसदों के दफ्तर गए और वहां जाकर मदद की गुहार लगाई। इसी दौरान किसी ने सुझाव दिया कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मिलें, वे आपकी पीएम मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात करा सकते हैं।

सिर्फ आश्वासन मिले, लेकिन रोजगार नहीं

हम लोग केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मिले, उन्हें ज्ञापन दिया। उन्होंने हमें 15 दिन के अंदर नियुक्ति पत्र दिलाने का आश्वासन दिया। 20 दिन बाद भी जब नियुक्ति पत्र नहीं मिले और गडकरी से मुलाकात भी नहीं हो सकी। तब हमने नागपुर के संविधान चौक पर 72 दिन तक अनशन किया। इसके बाद केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास अठावले ने वीडियो कॉन्फ्रेंस पर हम लोगों से बात की और जल्द ही नियुक्ति दिए जाने का आश्वासन दिया। जब करीब डेढ़ महीने बीत गए तब हमारे लड़कियों समेत कुछ साथी दिल्ली केंद्रीय मंत्री अठावले से मिलने उनके दफ्तर पहुंचे तो वहां उनके साथ बदसलूकी हुई। धक्के मारकर बाहर निकाल दिया गया। तब हम लोगों ने नागपुर से दिल्ली पैदल मार्च निकालने की ठानी।

पैदल मार्च के शुरू में थी सिर्फ 4 लड़कियां

नागपुर के संविधान चौक से 1 जून को 4 लड़कियों समेत 40 बेरोजगार युवाओं ने पैदल मार्च शुरू की थी। धीरे-धीरे इस मार्च में देशभर से लड़के और लड़कियां जुड़ते गए। अभी पैदल मार्च में 35 लड़कियों समेत 160 से अधिक बेरोजगार युवा हैं। पश्चिम बंगाल के मिदनापुर की रहने वाली रुपाली हिमरन ने बताया, हम लोग पिछले दो महीने से भूखे-प्यासे चल रहे हैं। न खाने को दाना नसीब होता है और न सोने का ठिकाना। कई बार तो पीने के लिए पानी भी नहीं होता है। मध्यप्रदेश के सागर के जिलाधिकारी ने हमें वहां खाने और पीने के लिए नहीं रुकने दिए। 49 डिग्री पारे में हम लोगों को बिना रुके चलते रहने का फरमान जारी कर दिया। आगरा पुलिस ने हम लोगों को पहले गुरुद्वारे में रुकवाया और उसके बाद धौलपुर, मुरैना, शिकोहाबाद और इटावा ले जाकर छोड़ दिया। हमारे साथियों के मोबाइल फोन भी छीन लिए और फिर कभी यूपी न आने की चेतावनी देकर छोड़ा गया। जब मथुरा पहुंचे तो वहां की पुलिस ने भी हमारे साथ बदसलूकी की। पूरे दिन धूप में बैठाकर रखा। इस कारण दो लड़कियों की तबीयत बिगड़ गई।

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