बुधवार, अक्टूबर 5, 2022
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इराक में श्रीलंका जैसी अराजकता : धर्मगुरु के राजनीति छोड़ने पर भड़के समर्थक, सुरक्षाबलों की फायरिंग में 20 की मौत

बगदाद। श्रीलंका की तरह इराक में भी स्थिति अराजक का माहौल है। इराक की राजधानी बगदाद में सियासी गतिरोध ना टूट पाने से नाराज शिया धर्मगुरु मुक्तदा अल-सदर ने सोमवार को राजनीति छोड़ने का ऐलान कर दिया। इस ऐलान के बाद सेना ने कर्फ्यू लगाया, लेकिन अल-सदर के समर्थक सड़क पर उतर आए। इस दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई। उग्र भीड़ ने श्रीलंका के घटनाक्रम की तरह इराक के राष्ट्रपति भवन और सरकारी भवनों पर कब्जा कर लिया। सुरक्षाबलों ने रोकने के लिए पहले आंसू गैस के गोले दागे और फायरिंग भी की, लेकिन वे नहीं माने। इस दौरान 20 लोगों की मौत हो गई, जबकि 300 से ज्यादा लोग घायल हो गए। भीड़ में शामिल अराजक तत्व राष्ट्रपति के महल में बने स्विमिंग पूल में धमाल मचाने लगे। वे अंदर स्विमिंग पूल, मीटिंग हॉल समेत पूरे पैलेस में घूमते नजर आए। बता दें कि मुक्तदा अल-सदर समर्थकों और उनके राजनीतिक विरोधी ईरान समर्थित शिया समूह के बीच लंबे समय से गतिरोध चल रहा है। ये लोग मुक्तदा अल-सदर के समर्थक बताए जा रहे हैं।

एक सप्ताह से चल रहा था प्रदर्शन

शिया धर्मगुरु के समर्थक बगदाद के ग्रीन जोन में स्थित संसद के बाहर एक सप्ताह से धरना दे रहे थे। जैसे ही उन्हें मुक्तदा अल सदर के राजनीतिक संन्यास के फैसले का पता चला, वे भड़क गए। इसके बाद सेना व पुलिस ने मोर्चा संभाला और प्रदर्शनकारियों से ग्रीन जोन छोड़ने की अपील की। बता दें, श्रीलंका में जबर्दस्त आर्थिक संकट के बाद पिछले माहों में राजनीतिक संकट पैदा हो गया था। उग्र भीड़ राष्ट्रपति भवन में घुस गई थी। संसद को बंधक बना लिया था। तत्कालीन राष्ट्रपति गोतबाया राजपक्षे को देश छोड़ने पर विवश होना पड़ा था।

नई सरकार को लेकर गतिरोध

दरअसल, इराक में नई सरकार बनाने को लेकर बीते एक माह से गतिरोध कायम है। शिया धर्मगुरु के समर्थक इराक में दशकों के संघर्ष और भ्रष्टाचार से निपटने के लिए आंदोलन कर रहे हैं। शिया धर्मगुरु इराक की राजनीति पर अमेरिका व ईरान का प्रभाव खत्म करने के पक्ष में थे। वे संसद भंग कर जल्दी चुनाव कराने की भी मांग कर रहे थे। इस बीच, अचानक उन्होंने ट्वीट किया कि-मैं राजनीति छोड़ रहा हूं। हालांकि, सांस्कृतिक और धार्मिक संस्थान खुले रहेंगे। राजनीति छोड़ने का फैसला चौंकाने वाला इसलिए है, क्योंकि उनकी पार्टी इस समय इराकी संसद में सबसे बड़ी पार्टी है।

संसद में सदर की सबसे ज्यादा सीटें, लेकिन बहुमत से दूर

पिछले साल अक्तूबर में इराक में चुनाव हुए थे। इसमें उनकी पार्टी ने 329 में 73 संसदीय सीटें जीती थी, लेकिन सदर ने दूसरे दलों के साथ गठबंधन सरकार बनाने से इनकार कर दिया था। संसद में सबसे बड़ा गुट होने के बाद भी सरकार नहीं बना पाए। अल-सदर ने पद छोड़ दिया। 2016 में भी अल-सदर के समर्थकों ने इसी तरह से संसद पर धावा बोल दिया था। उन्होंने धरना दिया था और राजनीतिक सुधार की मांग की था। इराक में अभी निवर्तमान प्रधानमंत्री मुस्तफा अल-कदीमी देश का कामकाज संभाले हुए हैं।

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