रविवार, नवम्बर 27, 2022
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सिद्धू मूसेवाला के आखिरी गाने SYL से घबराई सरकार: यूट्यूब ने हटाया, जानिए क्या है वजह

Sidhu Moosewala SYL music video removed : पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की हत्या के ठीक 24 दिन बाद यानी 23 जून 2022 को यूट्यूब पर ‘SYL’ के नाम से उनका सॉन्ग रिलीज हुआ। रिलीज होने के महज 72 घंटे के अंदर इस गाने को यूट्यूब पर 2.7 करोड़ ज्यादा लोगों ने देखा। इसके बाद यूट्यूब ने केंद्र सरकार से कानूनी शिकायत मिलने की बात कहकर ‘SYL’ सॉन्ग को अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया।

‘SYL’ गाने को हटाने पर अब यूट्यूब ने दी सफाई

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट मुताबिक सिद्धू मूसेवाला के सॉन्ग को हटाए जाने पर यूट्यूब प्रवक्ता ने कहा कि सरकार की ओर से की गई कानूनी शिकायत के बाद इस सॉन्ग को हटाया गया है। उन्होंने कहा कि जब सरकारें एक तय कानूनी प्रक्रिया को अपनाते हुए किसी वीडियो पर शिकायत करती हैं, तो उस वीडियो का रिव्यू किया जाता है। इस दौरान कम्यूनिटी गाइडलाइन को तोड़ने वाले वीडियो को हटा दिया जाता है। हालांकि यूट्यूब ने अब तक सार्वजनिक तौर पर मूसेवाला के सॉन्ग को हटाने के पीछे कोई वजह नहीं बताई है।

‘SYL’ सॉन्ग में पानी, खालिस्तानी और हत्या की बात करते हैं मूसेवाला

23 जून 2022 को यूट्यूब पर रिलीज हुए सिद्धू मूसेवाला के सॉन्ग ‘SYL’ में पंजाबी इतिहास और पहचान लौटाने की बात की गई है। इसके साथ ही मूसेवाला गाने में चंडीगढ़, हरियाणा और हिमाचल लौटाने की बात भी करते हैं। वह कहते हैं कि पानी तो भूल जाओ, हम एक बूंद नहीं देंगे जब तक कि हमें हमारी संप्रभुता नहीं दोगे।

इसी गाने में आगे 1990 के सतलुज-यमुना नहर की उस घटना का जिक्र होता है, जिसमें 2 इंजीनियरों की हत्या कर दी गई थी। अपने इस सॉन्ग में मूसेवाला ने दोनों इंजीनियरों के हत्यारे बलविंदर सिंह जटाना की तारीफ की थी। इसके साथ ही किसान आंदोलन के दौरान 26 जनवरी 2021 को लाल किला पर फहराए गए सिख झंडे, 1984 के सिख दंगे, पंजाब के सिख बंदियों और खालिस्तान समर्थक आतंकियों की बात भी इस गाने में की गई थी। यही वजह है कि रिलीज होने के बाद ही यह गाना वायरल होने लगा। बाद में केंद्र सरकार के निर्देश पर इस गाने के वीडियो को यूट्यूब ने हटा दिया है।

66 साल पुराना है पंजाब और हरियाणा के बीच ‘SYL’ नहर विवाद

पंजाब और हरियाणा के बीच पानी के बंटवारे को लेकर लड़ाई कोई नई नहीं है, बल्कि यह 66 साल पुरानी है। बात 1955 की है, जब नॉर्थ इंडिया के राज्यों जैसे- पंजाब, जम्मू कश्मीर और राजस्थान ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किया। इस समझौते में पेप्सू यानी आज के हरियाणा, हिमाचल और पंजाब के कुछ क्षेत्र भी शामिल थे। हालांकि जल बंटवारे को लेकर किया गया यह समझौता आने वाले समय में सफल नहीं रहा। इसके बाद जब 1 नवंबर 1966 को हरियाणा राज्य पंजाब से अलग हुआ तो इसके साथ ही दोनों राज्यों के बीच जल विवाद का मामला गहरा गया। बाद में इसे खत्म करने के लिए दोनों राज्यों के बीच 214 किलोमीटर लंबा जल मार्ग सतलुज-यमुना लिंक नहर बनाने पर सहमति बनी। इसके तहत सतलुज नदी को नहर के जरिए यमुना नदी से जोड़ा जाना था। इस नहर का 122 किलोमीटर लंबा हिस्सा पंजाब में जबकि 92 किलोमीटर हिस्सा हरियाणा में बनाया जाना था। दोनों राज्य सरकारों ने 1981 में इंदिरा गांधी की मौजूदगी में इस नहर के बचे हुए काम को 1983 से पहले पूरा करने का वादा किया था।

1990 में उग्रवादियों ने 2 इंजीनियरों को उतारा मौत के घाट

लोंगोवाल से समझौता होने के कुछ दिन बाद ही उनकी हत्या हो गई। यही नहीं 23 जुलाई 1990 को नहर पर काम कर रहे दो सीनियर इंजीनियरों समेत 35 मजदूरों को उग्रवादियों ने मार डाला था। इस घटना को अंजाम देने वाले के तौर पर बलविंदर सिंह जटाना का नाम आगे आया था। सिद्धू मूसेवाला के गाना में इसी जटाना की तारीफ की गई थी।

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