रविवार, नवम्बर 27, 2022
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Sawan 2022 Start : कल से सावन शुरू, जानिए भगवान शिव को क्यों समर्पित हैं ये महीना

कल से सावन (Sawan Month Start) का पवित्र महीना प्रारंभ होने जा रहा है। सनातन धर्म में श्रावण का महीना (Sravana 2022) बहुत ही पवित्र माना जाता है। सावन के महीने में भगवान शिव की विशेष रूप से पूजा-आराधना की जाती है। सावन का महीना चातुर्मास का पहला महीना माना जाता है। भगवान शिव (Lord Shiva With Prayers) की पूजा-आराधना और हर तरह की मनोकामना की पूर्ति के लिए सावन का महीना बहुत ही खास माना जाता है। इस बार सावन माह की शुरुआत 14 जुलाई से हो रही है जोकि 12 अगस्त तक रहेगा। सावन का पूरा महीना भगवान शिव की भक्ति और आराधना के लिए समर्पित होता है। श्रावण माह में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-आराधना का विशेष महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार सावन का महीना साल का पांचवां माह होता है।

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इस माह में सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु चार महीनों के लिए क्षीर सागर में माता लक्ष्मी के साथ योगनिद्रा में चले जाते हैं, ऐसे में सृष्टि की जिम्मेदारी भगवान शिव के कंधों पर आ जाती है। सावन के महीने के दौरान आने वाले सोमवार व्रत का विशेष महत्व होता है। सावन सोमवार में शिवलिंग का जलाभिषेक, बेलपत्र और भोलेनाथ की पूजा करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है। सावन महीने में कांवड़ यात्राएं निकाली जाती है जिसमें पवित्र नदियों से गंगाजल लेकर प्रसिद्ध ज्योर्तिलिंग पर जलाभिषेक किया जाता है। इसके अलावा शिव भक्त सावन के महीने में बड़ी संख्या में ज्योर्तिलिंग के दर्शन और पूजा-पाठ करते हैं। इस साल 14 जुलाई से शुरू होने वाले सावन के महीने का महत्व, पूजा पाठ करने की विधि के बारे में आइए जानते हैं।

श्रावण मास में क्यों की जाती है भगवान शिव की पूजा ?

श्रावण माह में की गई भगवान शिव की पूजा तत्काल शुभ फलदायी होती है। इसके पीछे स्वयं शिव का ही वरदान ही है। सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। श्रावण मास में क्यों की जाती है भगवान शिव की पूजा। इससे जुड़ी पौराणिक कथाओं के बारे में आइए जानते हैं।

पार्वतीजी की तपस्या से प्रसन्न हुए शिव

सावन के महीने में ही भगवान भोले शंकर ने देवी पार्वती को पत्नी माना था इसलिए भगवान शिव को सावन का महीना बहुत ही प्रिय है।

श्रावण मास में हुआ समुद्र मंथन

समुद्र मंथन के दौरान निकले हुए विष को न तो देव और न ही दानव ग्रहण करना चाहते हैं। तब भगवान शिव ने लोक कल्याण के लिए इस विष का पान कर लिया और उसे अपने गले में रोक लिया जिसके चलते उनका कंठ नीला पड़ गया। विष के प्रभाव से भगवान शिव का ताप बढ़ने लगा तब सभी देवी-देवताओं ने विष का प्रभाव कम करने के लिए भगवान शिव को जल अर्पित किया, जिससे उन्हें राहत मिली। तभी से हर वर्ष सावन मास में भगवान शिव को जल अर्पित करने या उनका जलाभिषेक करने की परंपरा चली आ रही है।

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श्रीराम ने किया था अभिषेक

मान्यताओं के अनुसार श्रावण मास में भगवान श्री राम ने भी सुल्तानगंज से जल लिया और देवघर स्थित वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग का अभिषेक किया। बस तभी से श्रावण में जलाभिषेक करने की परंपरा भी जुड़ गई।

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भगवान शिव के अभिषेक के फायदे

हमारे शास्त्रों में भगवान शिव का अभिषेक करने का फल बताया गया है। कई चीजों से भगवान शिव का अभिषेक किया जाता है और उसके फायदे भी मिलते हैं।
गन्ने के रस से अभिषेक- शीघ्र विवाह एवं धन की प्राप्ति होती हैं।
शहद से अभिषेक- कर्जमुक्ति एवं पूर्ण पति का सुख मिलता हैं।
दही से अभिषेक- पशुधन की वृद्धि होती हैं।
कुश एवं जल से अभिषेक- आरोग्य शरीर की प्राप्ति होती हैं।
मिश्री एवं दूध से अभिषेक- उत्तम विद्या की प्राप्ति होती हैं।
कच्चे दूध से अभिषेक- पुत्र सुख की प्राप्ति होती हैं।
इसके अलावा गाय के घी द्वारा रुद्राभिषेक करने पर सर्वकामना पूर्ण होती है। भगवान रूद्र को भस्म, लाल चंदन,रुद्राक्ष, आक का फूल, धतूरा फल, बिल्व पत्र और भांग विशेष रूप से प्रिय हैं अतः इन्ही पदार्थों से श्रावण सोमवार को शिवपूजन करें।

सावन पूजा में शिव आराधना में जरूर रखें इन बातों का ध्यान

  • भगवान शिव को कभी भी केतकी के फूल नहीं चढ़ाना चाहिए। मान्यता है कि केतकी के फूल चढ़ाने से भगवान शिवजी नाराज होते हैं। इसके अलावा भगवान शिव की पूजा में उन्हें तुलसी नहीं चढ़ाना चाहिए। अगर आप भगवान शिव पर नारियल का पानी चढ़ाते हैं तो वह भी वर्जित होता है। भगवान शिव को जलाभिषेक किसी कांस्य या पीतल के बर्तन से ही जल चढ़ाएं। शिवलिंग पर न ही हल्दी और कुमकुम लगाना चाहिए।
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