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Rupee Vs Dollar: पहली बार 80 के पार पहुंचा रुपया, 2014 से अब तक 25 प्रतिशत टूटा

नई दिल्ली। रुपया मंगलवार (19 जुलाई) को पहली बार 80 रुपये प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार कर गया है। रुपये में पिछले एक वर्ष के दौरान लगभग सात प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। डॉलर के मुकाबले, रुपया 4 पैसे कमजोर रिकॉर्ड निचले स्तर 80.01 पर खुला है। इससे पहले कल डॉलर के मुकाबले रुपया 79.97 पर बंद हुआ था। पिछले एक महीने में रुपया 2% से भी ज्यादा टूट चुका है। मंगलवार को शुरूआती बाजार में 80.0175 रुपये प्रति डॉलर पर ट्रेड कर रहा है। बाजार के जानकारों के अनुसार रुपया मंगलवार को 79.85 से 80.15 के रेंज के बीच कारोबार कर सकता है।

आपको बता दें कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने एक दिन पहले सोमवार को ही कहा था कि भारतीय रुपये की कीमतों में दिसंबर 2014 के बाद से अब तक अमेरिकी डॉलर की तुलना में 25 प्रतिशत तक की गिरावट आ चुकी है। वित्तमंत्री ने यह भी कहा था कि हाल के दिनों में रुपये की गिरावट का कारण अंतरराष्ट्रीय बाजारों में क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें और रूस व यूक्रेन के बीच बीते फरवरी महीने से चल रही लड़ाई है। वित्तमंत्री ने इस दौरान यह भी कहा है कि पिछले कुछ दिनों में भारतीय मुद्रा की तुलना में ब्रिटिश पाउंड, जापानी मुद्रा येन और यूरोपियन यूनियन की मुद्रा यूरो डॉलर के मुकाबले कहीं अधिक कमजोर हुई है। भारतीय मुद्रा इन देशों के मुद्रा की तुलना में मजबूत हुई है।

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अमेरिका में बढ़ रही महंगाई के कारण टूट रहा रुपया

बाजार के जानकारों के मुताबिक बीते कुछ महीनों में दुनियाभर के निवेशक यूरोपियन यूनियन के बाजारों में मंदी की आशंका के मद्देनजर अपेक्षाकृत सुरक्षित अमेरिकी बाजार में निवेश करने को तरजीह दे रहे हैं, यही कारण है कि डॉलर लगातार यूरोपियन यूनियन और एशियाई देशों की मुद्राओं की तुलना में मजबूत होता जा रहा है। अमेरिका में बढ़ रही लगातार महंगाई के कारण भी वहां के निवेशक बाहरी देशों से अपना निवेश घटा कर उसे घरेलू बाजार में डाल रहे हैं इससे डॉलर मजबूत होता जा रहा है।

कुछ दिनों तक रुपये पर बना रह सकता है दबाव

बाजार के जानकारों के मुताबिक अभी कुछ दिनों तक रुपए पर थोड़ा दबाव बना रहेगा लेकिन देश के पास काफी अच्छा फॉरेक्स रिजर्व (575 मिलियन डॉलर) हैं जिसके बूते रिजर्व बैंक स्थिति को संभालने में सक्षम है। उम्मीद है जल्द ही RBI इस मामले में दखल देगा।

कहां फायदा कहां नुकसान

बाजार के जानकारों के मुताबिक, निर्यात करने वालों को फायदा होगा। क्योंकि पेमेंट डॉलर में मिलेगा, जिसे वह रुपए में बदलकर ज्यादा कमाई कर सकेंगे। इससे विदेश में माल बेचने वाली IT और फार्मा कंपनी को फायदा होगा। वहीं कच्चे तेल का आयात महंगा होगा, जिससे महंगाई बढ़ेगी। देश में सब्जियां और खाद्य पदार्थ महंगे होंगे। वहीं भारतीयों को डॉलर में पेमेंट करना भारी पड़ेगा। यानी विदेश घूमना महंगा होगा, विदेशों में पढ़ाई महंगी होगी।

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