रविवार, नवम्बर 27, 2022
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कलयुग की मीरा (आरती) पर खाटूश्यामजी की भक्ति का चढ़ा कुछ ऐसा रंग, नर्स की नौकरी और परिवार को छोड़ खाटू धाम में बस गयी

राजस्थान के सीकर में इन दिनों भगवान खाटूश्यामजी का लक्खी मेला चल रहा है, बाबा श्याम के दरबार में अपनी हाजिरी लगाने के लिए भारत के सभी कोने से लाखों की संख्या में भक्त दर्शन करने के लिए पहुच रहे है. फाल्गुन में भरने वाले इस लक्खी मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु पद यात्रा करके भी बाबा के दरबार में अपनी मनोकामनाओं को लेकर पूरे श्रधा के साथ आ रहे है.

लेकिन आज हम आपको बाबा की ऐसी भक्त के बारे में बताने जा रहे है जिसे कलयुग की मीरा भी कहा जाता है. हम बात कर रहे है बाबा श्याम की कलयुग की मीरा की, अजमेर की आरती बाबा श्याम की ऐसी भक्त है जो मीरा के नाम से प्रसिद्ध है. आरती बाबा श्याम को हर रोज 51 निशान चढ़ा रही है. आपको बता दे की आरती ने खाटूश्यामजी के लिए 51 निशानों के साथ 100 दिन की पद यात्रा शुरू करी थी जो बाबा खाटूश्यामजी के जन्मदिवस कार्तिक माह की देवउठनी एकादशी से शुरू करी थी, और आज भी जारी है. अजमेर की आरती 7 साल से लगातार बाबा श्याम के दरबार में निशान चढ़ा रही है.

सबसे महत्वपूर्ण बात ये है की आरती ने जब से बाबा के दरबार की पदयात्रा शुरू करी है तब से लेकर आजतक उनके पैरों में एक भी छाला नही पड़ा है. ज्यादातर श्रधालुओं के रींगस से खाटूश्यामजी की पद यात्रा करने में ही पैरों में छाले पड़ जाते है, लेकिन आरती के साथ ऐसा नही है वो निरंतर अपनी पद यात्रा कर रही है और उनके पैरों में एक भी छाला नही पड़ा है.

आरती से जब उनकी इस पद यात्रा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा की वो नाचते-गाते श्याम की पद यात्रा कर रही है, लेकिन उन्हें किसी भी प्रकार की थकान या पैरों में दर्द नही होता है. और उनकी इस यात्रा में श्याम बाबा का ही आशीर्वाद है. उसने बताया की वो पहले भी बाबा के दरबार की पदयात्रा करते हुए 11,21,31, और 41 निशान अर्पित कर चुकी है.

आरती ने बताया की वो पिछले 8 साल में अजमेर से यात्रा करके अभी तक 19 हजार से भी ज्यादा निशान बाबा के दरबार में अर्पित कर चुकी है. फाल्गुन में भरने वाले इस मेले में वो रींगस से खाटूश्यामजी के लिए पदयात्रा करके रोजाना 51 निशान चढ़ा रही है.

आरती अजमेर की रहने वाली है, उसने समाजशास्त्र से MA की पढ़ाई कर रखी है, वो जयपुर के एक अस्पताल में नर्स की नौकरी भी करती थी. बाबा श्याम के प्रति उनकी इस श्रधा के बारे में जब पूछा गया तो उन्होंने बताया की एक बार वो श्याम बाबा के भजन-कीर्तन संध्या में गयी थी, वहां पहुचते ही वो बाबा के भजनों में रंग गयी और तब से ही वो श्याम की दीवानी हो गयी. बाबा श्याम के प्रति उनकी लगन ऐसी बढ़ी की आरती ने अपनी नौकरी के साथ ही घर-परिवार को भी छोड़ दिया. इसके बाद आरती खाटूश्यामजी में आकर बस गयी. उन्होंने ने आगे बताया की श्याम बाबा ने कई बार उसे दर्शन भी दिए है. बाबा श्याम में उनकी भक्ति को देखकर लोग उन्हें कलयुग की मीरा के नाम से पुकारने लग गये.

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