शुक्रवार, अगस्त 19, 2022
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सेना के कर्नल और समाज के सिपाही के तौर पर, गुर्जर नेता Kirori Singh Bainsla का सफ़र शानदार रहा

गुर्जर समाज के नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला जो की राजस्थान में गुर्जर आरक्षण आंदोलन का एक बड़ा चेहरा रहे, आज गुरुवार को उनका निधन हो गया. बैंसला एक ऐसी शख्सियत थे की उनके एक इशारे पर पूरा राजस्थान जाम हो जाता था. समाज के बीच उनकी शानदार छवि थी, और लोग उनके कहने मात्र से ही कई दिनों तक रेलवे ट्रेक और सड़क पर बैठे रहते थे. बैंसला ने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षक के तौर पर करी थी, लेकिन उनके पिता के फ़ौज में होने की वजह से वो भी फ़ौज में जाना चाहते थे, और इसके बाद वो राजपूताना राइफल्स में सिपाही की पोस्ट पर भर्ती हो गये.

किरोड़ी सिंह ने 1962 के भारत-चीन और 1965 के भारत-पाकिस्तान के युद्ध में भाग लिया था. आपको ये भी बता दे की किरोड़ी सिंह पाकिस्तान में युद्धबंदी भी रहे थे. लेकिन अपनी जाबांजी के कारण वो एक सिपाही से कर्नल के पद तक पहुचे.

आप को बता दे की बैंसला का जन्म राजस्थान के करौली जिले के मुंडिया गाँव में गुर्जर परिवार में हुआ था. बैंसला को उनके साथी सेना में उन्हें रॉक ऑफ जिब्राल्टर और इंडियन रैम्बो के नाम से पुकारते थे. बैंसला के दोनों बेटे भी सेना में कार्यरत है, और एक बेटी अखिल भारतीय सेवा में अधिकारी है, जबकि एक बेटा निजी कंपनी में कार्यरत है.

आर्मी से रिटायर होने के बाद बैंसला राजस्थान के गुर्जर समाज के गाँव-गाँव में घूमकर उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी लेने लगे. बैंसला ने गुर्जर समाज को आरक्षण दिलाने के लिए कई बड़े आंदोलन करे थे. उन्होंने कहा था की राजस्थान के मीणा समाज को अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्राप्त है, जिससे उन्हें सरकारी नौकरी में ख़ासा प्रतिनिधित्व मिलता है. लेकिन गुर्जर समाज के साथ ऐसा नही है. और इसलिए गुर्जर समाज को उनका हक़ मिलना चाहिए, जिसके लिए बैंसला ने कई आंदोलन किए और वो अंतत सरकारी नौकरियों में 5 फीसदी आरक्षण दिलाने में सफल हुए.

2007 में हुए गुर्जर आरक्षण आंदोलन की वजह से उस समय की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को काफी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था. ये आंदोलन राजस्थान के प्रत्येक जिले में काफी उग्ररूप ले चूका था और बैसला ने भी ठान लिया था की जब तक उनकी मांगे नही मान ली जाती वो अपना आंदोलन वापिस नही लेंगे. इस आंदोलन के दौरान गुर्जर समाज के कई लोग इसमें शहीद हो गये थे. बीजेपी की सरकार को इस आंदोलन की वजह से विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था.

इसके बाद सत्ता में कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार आई और उसने गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति की मांगो को मान लिया था, जिसके बाद अलग से MBC में गुर्जर समाज के लिए 5 प्रतिशत आरक्षण को लागू कर दिया गया.

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