शुक्रवार, दिसम्बर 2, 2022
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राजस्थान में किसानों की जिद ने सिंचाई विभाग से करवा दिया गजब कारनामा

जयपुर। एक कहावत है ‘मन के हारे हार है और मन के जीते जीत’। इंसान अगर ठान ले तो मुश्किल से मुश्किल काम को भी मुमकिन कर सकता है। हाल ही में ऐसा ही कमाल राजस्थान में देखने को मिला है। आप सभी जानते है कि गर्मियों में पानी की कितनी किल्लत होती है। खासतौर पर राजस्थान की बात की जाए तो वहां पर इन दिनों पानी मिलना बहुत मुश्किल है। लेकिन राजस्थान की राजधानी जयपुर में भी ऐसा ही कुछ हुआ है, जो पहले सोच के भी परे था।

जयपुर से करीब 25 किलोमीटर दूर यहां के किसानों की जिद ने सिंचाई विभाग से गजब कारनामा करवा दिया। यहां सिंचाई विभाग ने ऐसा करिश्मा कर दिखाया है, जिससे अब 50 गांवों की तकदीर बदल जाएगी। दरअसल 25 किमी. दूर नेवटा बांध के आसपास के गांवों में ग्राउंड वाटर नीचे गया, तो यहां किसानों ने इस समस्या को सिंचाई विभाग के अफसरों के सामने रखा। बार-बार ग्रामीणों की ओर से समस्या बताए जाने के बाद सिंचाई विभाग ने कुछ ऐसा कर दिया, जो कभी सपना सा लगता था। यहां ग्रामीणों-किसानों के साथ मिलकर सिंचाई विभाग के अफसरों ने 40 साल पुरानी लुप्त तीन नहरें खोज निकालीं।

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50 गांवों की 700 एकड़ भूमि की हो सकेगी सिंचाई

जानकारी के अनुसार लुप्तप्राय हो चुकी नहरें नेवटा बांध से जुड़ी थीं। इनकी खुदाई का काम चल रहा है, जो 90 प्रतिशत तक हो चुका है। सिंचाई विभाग ने 1.60 करोड़ रुपए की लागत से इन नहरों की खुदाई की है। वहीं अब इन नहरों के जरिए 50 गांवों की 700 एकड़ भूमि की सिंचाई हो सकेगी। वहीं जलसंकट से भी निजात मिल सकेगी। बताया जा रहा है कि जयपुर में ऐसा पहली बार हुआ है, जब लुप्त नहरों को तलाश कर सिंचाई होगी। नेवटा बांध में द्रव्यवती नदी से लगातार पानी की आवक है। बांध में अभी पानी का लेवल 14 फीट 10 इंच है। कुल भराव क्षमता 16 फीट है।

आखिर ऐसे सच हुआ सपना

जानकारी के अनुसार किसानों की मांग पर सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने रेवेन्यू रिकॉर्ड के माध्यम से डिमार्केशन करवाकर नहरों की सीमाएं निश्चित की। इसके बाद जगह तय होने के बाद चयनित स्थानों की खुदाई शुरू की गई, जो जारी है। नरेगा फंड के तहत यहां खुदाई का कार्य करवाया जा रहा है। इस कार्य के लिए यहां 75 हजार मानव श्रम दिवस लगाया गया है। बताया जा रहा है कि नवंबर में यहां पानी छोड़ा जाएगा। इसके लिए जल वितरण कमेटी बनाई जाएगी, जिसमें सहमति से ही नहरों में पानी छोड़ा जाएगा।

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