सोमवार, अक्टूबर 3, 2022
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INS Vikrant: भारतीय नौसेना की समंदर में बढ़ी ताकत : पीएम मोदी ने शेयर किया INS विक्रांत का वीडियो

नई दिल्ली। समंदर में ताकत बढ़ाने के लिए भारतीय नौसेना को अपना दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत मिल गया है। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी भी शामिल हुए थे और उन्होंने देश को पहला स्वदेशी विमान वाहक पोत समर्पित किया। पीएम मोदी के अलाला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल समेत पुराने INS विक्रांत के पूर्व नौसैनिक भी उपस्थित थे। INS विक्रांत के आने से हिंद महासागर में भारत की ताकत बढ़ गई है। ये एयरक्राफ्ट कैरियर पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से बना है। INS विक्रांत के अलावा INS विक्रमादित्य भी भारत के पास है।

पीएम मोदी ने शेयर किया वीडियो

INS विक्रांत के आधिकारिक तौर पर नौसेना में शामिल होने के बाद पीएम मोदी ने ट्विटर पर एक वीडियो शेयर किया है। दो मिनट 52 सेकंड के वीडियो में कार्यक्रम की सभी यादों को संजोया गया है। यह वीडियो INS विक्रांत की कमीशनिंग सेरेमनी की झलकियों का है। पीएम मोदी ने अपने ट्विटर हैंडल पर वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “भारत के लिए एक ऐतिहासिक दिन! जब मैं कल आईएनएस विक्रांत पर सवार था तो उस गर्व की भावना को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।”

पीएम ने बताया था परिश्रम का प्रमाण

INS विक्रांत को देश को समर्पित करते हुए पीएम मोदी ने कहा था, विक्रांत केवल एक युद्धपोत नहीं है, यह 21वीं सदी के भारत के परिश्रम, प्रतिभा, प्रभाव और प्रतिबद्धता का प्रमाण है। आजादी के आंदोलन में हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस सक्षम, समर्थ और शक्तिशाली भारत का सपना देखा था। उसकी जीती जागती तस्वीर विक्रांत है। अगर समंदर और चुनौतियां अनंत हैं तो भारत का उत्तर है-विक्रांत। आजादी के अमृत महोत्सव का अतुलनीय योगदान है-विक्रांत।

23 हजार टन स्टील से बना INS विक्रांत

सबसे पहली और गौर करने वाली बात यह है कि भारत में बने INS विक्रांत में इस्तेमाल सभी चीजें स्वदेशी नहीं हैं। यानी कुछ कलपुर्जे विदेशों से भी मंगाए गए हैं। हालांकि, नौसेना के मुताबिक, पूरे प्रोजेक्ट का 76 फीसदी हिस्सा देश में मौजूद संसाधनों से बना है। भारतीय नौसेना के मुताबिक, इस युद्धपोत की जो चीजें स्वदेशी हैं, उनमें 23 हजार टन स्टील, 2.5 हजार टन स्टील, 2500 किलोमीटर इलेक्ट्रिक केबल, 150 किमी के बराबर पाइप और 2000 वॉल्व शामिल हैं। इसके अलावा एयरक्राफ्ट कैरियर में शामिल हल बोट्स, एयर कंडीशनिंग से लेकर रेफ्रिजरेशन प्लांट्स और स्टेयरिंग से जुड़े कलपुर्जे देश में ही बने हैं। विक्रांत के निर्माण के लिए जरूरी युद्धपोत स्तर की स्टील को स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) से तैयार करवाया गया। इस स्टील को तैयार करने में भारतीय नौसेना और रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (DRDL) की भी मदद ली गई। बताया गया है कि SAIL के पास अब युद्धपोत स्तर की स्टील बनाने की जो क्षमता है, वह आगे देश में काफी मदद करेगी।

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