रविवार, नवम्बर 27, 2022
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हिमाचल की झील में 7 नहीं, 8 युवकों ने लगाई थी छलांग! इस तरह बची आठवीं जान, एक ही परिवार ने 4 सदस्यों को खोया

ऊना। हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के बंगाना में गरीब नाथ मंदिर में हुई दिल दहला देने वाली घटना से हर कोई सदमे में है। इस घटना में मिराशाह कॉलोनी, बनूर, मोहाली के वार्ड नंबर 11 के 7 युवकों की गोबिंद सागर झील में डूबने से मौत हो गई। गौरतलब है कि सोमवार को सावन के महीने में मंदिरों में दर्शन करने के लिए पंजाब से आए सात युवकों की गोबिंद सागर झील में डूबने से मौत हो गई थी। ये सभी झील में नहाने के लिए उतरे थे और तैरना नहीं जानते थे। झील की गहराई का अंदाजा न होने के कारण अचानक एक युवक डूबने लगा तो अन्य ने चेन बनाकर बचाने की कोशिश की। लेकिन देखते ही देखते सभी झील में डूब गए। बताया जा रहा है कि चार बाइकों में सवार होकर 11 युवक यहां पहुंचे थे।

ऊना के पीरनिगाह के बाद कोलका स्थित बाबा गरीबनाथ मंदिर में माथा टेकने के बाद सभी को बाबा बालक नाथ मंदिर और वहां से नयना देवी होते हुए वापस जाना था। इसी बीच गरीबनाथ मंदिर से सटी झील में सात युवा नहाने के लिए उतर गए। दो युवक गुरप्रीत और रमन कुमार बाहर बैठकर इन्हें देखने लगे। अन्य दो युवक सोनू और कृष्ण लाल थोड़ी दूर खड़ी बोट के पास सेल्फी लेने लगे। नहाने उतरे युवकों में से एक अचानक डूबने लगा। इसे बचाने के लिए अन्य युवक चेन बनाने की कोशिश करने लगे।

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संतुलन न बनने की वजह से बारी-बारी सभी युवक डूबने लगे। यह देख किनारे बैठे गुरप्रीत और रमन कुमार चिल्लाने लगे। चीख पुकार सुनकर सोनू और कृष्ण लाल भी दौड़कर किनारे पर पहुंच गए। दोस्तों को डूबता देख कृष्ण लाल भावुक हो गया और वह भी झील में कूद पड़ा। थोड़ी ही देर में कृष्ण लाल भी झील में डूबने लगा लेकिन सोनू ने उसे बचा लिया। चीख पुकार सुनकर स्थानीय लोग भी घटनास्थल पर पहुंच गए लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।

इस हादसे में लालसिंह ने अपने परिवार के चार सदस्यों को खो दिया, जिनमें दो बेटे, एक भाई और एक भतीजा शामिल है। एक बेटा 10वीं में और दूसरा 12वीं में पढ़ रहा था। लालसिंह का 13 वर्षीय बेटा लव कुमार सबसे पहले नदी में नहाने गए थे, उन्हें यह नहीं पता था कि पानी इतना गहरा है। उसका भाई रमन कुमार उसे बचाने के लिए उसके पीछे गया लेकिन वह भी डूब गया। उसके बाद चचेरे भाई और फिर एक-एक कर डूब गए।

लालचंद के भाई ने बचाव के लिए शोर मचाया तो आठवां युवक भी नदी में बह गया। जब सात लोग डूब रहे थे तो आठवां युवक भी नदी में कूद गया। लेकिन उसे बचाने के लिए वहां खड़ी नाव की रस्सी फेंक कर उसे वापस खींच लिया गया। इस तरह आठवें युवक को बचा लिया गया लेकिन बाकी सात लोग तब तक नदी में डूब चुके थे। इस हादसे से लालचंद पूरी तरह टूट गया है।

लालचंद की पिछले साल हादसे में चार जगह से टांग टूट गई थी। वह अभी तक बिस्तर पर है। ज्यादा चल नहीं सकते लेकिन इस हादसे ने उनकी कमर पूरी तरह तोड़ दी है। अब पता नहीं समय का कौन सा मरहम उन्हें इस मुसीबत से बाहर निकाल पाएगा।

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