बुधवार, अक्टूबर 5, 2022
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सुपरटेक के ट्विन टॉवर 28 अगस्त को गिराए जाएंगे : सुप्रीम कोर्ट ने दी इजाजत

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में सुपरटेक के 40 मंजिला ट्विन टॉवर को गिराने की इजाजत दे दी है। 28 अगस्त को ट्विन टॉवर गिराए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को ट्विन टावर गिराने को लेकर पेश स्टेटस रिपोर्ट पर सुनवाई करते हुए यह इजाजत दी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दोनों जुड़वां इमारतें गिराने में किसी भी तरह की समस्या आए तो एक हफ्ते की अतिरिक्त समय सीमा दी गई है। कोर्ट ने इससे पहले मई में ट्विन टॉवर को गिराए जाने के लिए 3 महीने की इजाजत दी थी।

एडिफिस इंजीनियरिंग कंपनी ट्विन टॉवर को 28 अगस्त तक गिराने का प्रयास कर रही है। पहले की योजना के मुताबिक दो अगस्त से ट्विन टावर में विस्फोटक लगाने का काम शुरू कर 18 अगस्त तक पूरा कर लेना था। दो दिन के निरीक्षण के बाद 21 अगस्त को अंतिम ब्लास्ट की तिथि निर्धारित की गई थी, लेकिन अब जहां 11 अगस्त का समय बीत चुका है और अभी तक पलवल से विस्फोटक नहीं लाया जा सका है। चिंता इसलिए भी है कि एडिफिस इंजीनियरिंग ने प्राधिकरण को लिखे पत्र में साफ कहा है कि अगर 28 अगस्त तक अंतिम ब्लास्ट नहीं किया जाएगा तो फिर उसकी सहयोग संस्था जेट डिमोलिशन के पास नवंबर से पहले इसके लिए समय नहीं है। यही नहीं एजेंसी ने चेतावनी जारी करते हुए कहा कि अगर अंतिम ब्लास्ट जल्दी नहीं होता है तो इस इमारत से खतरा पैदा होगा क्योंकि यह इमारत काफी कमजोर हो गई है और यह किसी ओर गिर सकती है। इसके अलावा अंतिम ब्लास्ट के लिए की गई व्यवस्था भी खराब होगी।

क्या है पूरा मामला?

ये ट्विन टावर नोएडा के सेक्टर-93 ए में स्थित है। नोएडा प्राधिकरण ने 2006 में सुपरटेक को 17.29 एकड़ (लगभग 70 हजार वर्ग मीटर) जमीन सेक्टर-93 ए में आवंटित की थी। इस सेक्टर में एमेराल्ड कोर्ट ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट के तहत 15 टावरों का निर्माण किया गया था। प्रत्येक टॉवर में 11 मंजिल बनी थीं। 2009 में नोएडा अथॉरिटी के पास सुपरटेक बिल्डर ने रिवाइज्ड प्लान जमा कराया।

इस प्लान में एपेक्स व सियान नाम से दो टावरों के लिए एफएआर खरीदा। बिल्डर ने इन दोनों टावरों के लिए 24 फ्लोर का प्लान मंजूर करा लिया। इस पर बिल्डर ने 40 फ्लोर के हिसाब से 857 फ्लैट बनाने शुरू कर दिए। इनमें 600 फ्लैट की बुकिंग हो गई। ज्यादातर ने फ्लैट की रकम भी जमा करानी शुरू कर दी। हालांकि, कुछ दिन बाद ही बॉयर्स ने इसका विरोध शुरू कर दिया और इसे गिराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 11 अप्रैल 2014 में हाईकोर्ट ने दोनो टावरों को गिराने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।

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