मंगलवार, अगस्त 16, 2022
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Miracle Mike Chicken : अजीबोगरीब मुर्गा, गर्दन कटने के बाद भी 18 महीने तक रहा जिंदा

क्या सिर कटने के बाद भी कोई इंसान या जीव-जंतु जिंदा रह सकता है? आप कहेंगे- बिल्कुल नहीं। लेकिन अमेरिका में आज से 74 साल पहले कुछ ऐसी ही अजीबोगरीब घटना हुई थी। यहां एक मुर्गा सिर कटने के बावजूद करीब 18 महीने तक जिंदा रहा था। उस समय बिना सिर के किसी मुर्गे को देखकर लोग हैरान हो जाते थे। अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा कैसे हुआ था, तो इसके बारे में भी बता देते हैं।

दरअसल, ये साल 1945 की बात है। अमेरिका का एक राज्य है कोलाराडो, जहां एक किसान रहता था। किसान का नाम था लॉयड ओल्सेन। लॉयड अपनी पत्नी क्लारा के साथ अपने फार्म पर मुर्गे-मुर्गियों को काट रहे थे। उन्होंने कई मुर्गे-मुर्गियां काटी। इस दौरान लॉयड ने साढ़े पांच महीने के एक मुर्गे का सिर काटा, जिसका नाम माइक था, लेकिन उन्हें हैरानी तब हुई जब वह मुर्गा मरा नहीं बल्कि बिना सिर के ही दौड़े जा रहा था। इसके बाद उन्होंने उसे एक बक्से में बंद कर दिया, लेकिन अगली सुबह जब उठकर देखा तो वह जिंदा ही था और अपने कटे हुए सिर के पास सो रहा था।

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जब धीरे-धीरे माइक के बारे में पूरे फ्रूटा में उसके बाद अमेरिका के कई शहरों में भी फैल गई। कहते हैं कि साल्ट लेक सिटी में स्थित यूटा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने यह जानने के लिए कई मुर्गों के सिर काट दिए थे कि बिना सिर के वो जिंदा रहते हैं या नहीं, लेकिन माइक जैसी खूबी उन्हें किसी भी मुर्गे में नहीं मिली। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिना सिर वाले इस मुर्गे को ड्रॉप से जूस वगैरह दिया जाता था और उसकी भोजन नली को सीरिंज से साफ किया जाता था, ताकि उसका दम न घुटे।

हालांकि मार्च 1947 में उसकी मौत हो गई। इसकी वजह बताई जाती है कि लॉयड ओल्सेन उसे जूस देने के बाद उसकी भोजन नली को सीरिंज से साफ नहीं कर पाए थे, क्योंकि वो सीरिंज को कहीं दूसरी जगह भूल कर आ गए थे। इसी वजह से माइक की दम घुटने से मौत हो गई थी। कहते हैं कि ‘मिरेकल माइक’ की ख्याति इतनी फैल चुकी थी कि लॉयड ओल्सेन ने उसे देखने तक के लिए भी टिकट लगा दिया था। उस जमाने में वह उस मुर्गे से 4500 डॉलर हर महीने कमाते थे। आज के हिसाब से ये 4500 डॉलर करीब तीन लाख 20 हजार रुपये होते हैं। इस मुर्गे की वजह से ही लॉयड ओल्सेन की आर्थिक स्थिति सुधर गई थी।

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, लॉयड मुर्गे को लेकर साल्ट लेक सिटी में स्थित उटाह यूनिवर्सिटी में लेकर गया था। वहां वैज्ञानिक माइक को देखकर हैरान रह गए। वैज्ञानिकों ने माइक का कई परीक्षण किया और इस नतीजे पर पहुंचे कि सिर से दिल को पहुंचाने वाली नस कुल्हाड़ी से कट नहीं पाई थी और उसमें खून जम गया। नतीजा यह हुआ कि माइक का ज्यादा खून नहीं बहा जिससे वह जिंदा रहा। वह चलता-फिरता भी रहा और उसका दिमाग भी पहले की तरह ही काम करता रहा। माइक की याद में कोलराडो के फ्रूटा शहर में उसकी एक प्रतिमा बनाई गई है। वहां हर साल माइक द ‘हेडलेस चिकन’ फेस्टिवल भी मनाया जाता है। इसकी शुरुआत साल 1999 में हुई थी। इस महोत्सव में हजारों लोग शामिल होते हैं, जिसमें कई तरह की प्रतियोगिताएं होती हैं और यहां तक कि गाने-बजाने का भी कार्यक्रम होता है।

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