सोमवार, अक्टूबर 3, 2022
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Man of the Hole : इस सदी के आखिरी ‘आदिमानव’ की मौत : रहस्यमयी इंसान को लेकर खुला बड़ा राज, जानिए कैसे करता था हमला

नई दिल्ली। ब्राजील में रहने वाली जनजाति के आखिरी सदस्य की भी मौत हो गई। यह जनजाति अमेजन के जंगलों में रहती थी। इस शख्स की मौत के बाद अब यह जनजाति धरती से पूरी तरह खत्म हो गई है। ब्राजील की इंडीजीनियस प्रोटेक्शन एजेंसी फुनाई की तरफ से इस शख्स के मौत की जानकारी दी गई है। लगातार इस जनजाति की जमीन पर हमले किए गए जिसमें इस शख्स के कई रिश्तेदारों और दोस्तों की मौत हो गई। धरती से खत्म हो जाने वाली इस जनजाति के बारे में आइए जानते हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह अपनी जनजाति का आखिर इंसान था। रिपोर्ट के मुताबिक, इस शख्स की लाश झोपड़ी के अंदर पाई गई थी। अभी तक जांच में पता चला है कि इस शख्स की किसी से कोई लड़ाई नहीं हुई थी। अधिकारियों ने भी किसी भी तरह की हिंसा नहीं होने की बात कही है। उनका कहना है कि इस शख्स की मौत प्राकृतिक है।

कई सालों से जंगलों में अकेले ही रहता था यह शख्स

बताया जाता है कि इस जनजाति का यह आखिरी शख्स कभी भी किसी बाहरी व्यक्ति के संपर्क में नहीं आया था और कई सालों से जंगलों में अकेले ही रहता था। इस इंसान को लोग गड्ढे का इंसान (Man of the Hole) कहते थे, क्योंकि यह ज्यादातर गड्ढे में ही रहता था। यह शख्स अपनी रक्षा के लिए गड्ढे बनाता था और उसी में रहता था। बताया जाता है कि इस शख्स ने कभी किसी बाहरी इंसान से मिलने की कोशिश नहीं की। अगर कोई भी इंसान इस शख्स के पास जाता था, तो वह उसे जाल में फंसा लेता था और तीर से उस पर हमला बोल देता था। मैन ऑफ द होल के नाम से मशहूर यह शख्स बीते कई सालों से तनारु (Tanaru Indigenous land) में रहता था। ब्राजील के रोंडोनिया राज्य के अमेजन जंगल में यह इलाका स्थित है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आवा (Awa) जनजाति का यह शख्स था। अमेजन के जंगलों में रहने वाली इस जनजाति को ब्राजील का मूल निवासी माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया इस शख्स को रहस्यमयी इंसान के तौर पर जानती थी जिसकी उम्र करीब 60 साल थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, 70 के दशक तक इस जनजाति के लोगों की अलग-अलग हमलों में मौत हो गई थी। यह हमले भूमाफिया और किसानों द्वारा किए गए थे।

1996 में पहली बार दिखा था शख्स

रिपोर्ट की मानें तो उस शख्स को सबसे पहले साल 1996 में देखा गया था। उससे संपर्क साधने के लिए काफी कोशिशें की गईं, खाने का पार्सल रखा गया मगर वो शख्स कभी उसे नहीं अपनाता था। 23 अगस्त को शख्स की लाश एक झोपड़ी में मिली जिसमें वो रहा करता था। माना जाता है कि जनजाति के अन्य सदस्य 80 के दशक तक मर चुके थे।

खुला बड़ा राज

जानकारों ने जनजाति के आखिरी सदस्य को लेकर एक चौंकाने वाला दावा किया है जिससे मुमकिन है कि बड़ा राज खुल गया है। उन्होंने बताया कि शख्स को अपनी मौत के बारे में पहले से पता था, क्योंकि लाश के हाथ में मकाऊ तोते का पंख था। उस जनजाति में ये प्रथा थी कि मरते समय लाश के हाथ में तोते का पंख रखा जाता था। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये है कि उस जनजाति का ना ही लोगों को नाम पता था और ना ही वो क्या भाषा बोलते थे, इसके बारे में कोई जानकारी थी। पुलिस ने जांच में पाया कि उसकी लाश के पास किसी भी तरह के हिंसा कोई निशान नहीं थे। ऐसे में हत्या की संभावना को खारिज कर मौत प्राकृतिक कारणों से बताई जा रही है। हालांकि, अब पुलिस लाश की फॉरेन्सिक जांच करेगी।

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