शुक्रवार, दिसम्बर 2, 2022
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महाराष्ट्र में सत्ता का नया समीकरण: राज ठाकरे की मनसे में शामिल हो सकता है शिंदे गुट!

Maharashtra Political Crisis : मुंबई। महाराष्ट्र में जारी सियासी संकट (Maharashtra Political Crisis) अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) तक पहुंच गया है। शिवसेना के बागी नेता एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई होगी। बता दें कि एकनाथ शिंदे ने महाराष्ट्र विधानसभा के डिप्टी स्पीकर की ओर से भेजे गए अयोग्यता नोटिस के फैसले पर चुनौती दी है। वहीं, इस बीच गुवाहाटी से ये भी खबर सामने आ रही है कि दोपहर 2 बजे एकनाथ शिंदे ने बागी नेताओं की बैठक बुलाई है। इस बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा हो सकती है। वहीं दूसरी ओर सुत्रों से मिल रही खबर है कि शिवसेना का बागी एकनाथ शिंदे गुट राजनीति के नए विकल्प तलाश रहा है।

शिवसेना के नाम पर राजनीति करने वाला शिंदे गुट ठाकरे नाम और हिंदुत्व दोनों को नहीं छोड़ना चाहता है। ऐसे में एकनाथ शिंदे गुट के 38 विधायक राज ठाकरे की पार्टी मनसे में शामिल हो सकते हैं। मनसे में शामिल होने के पीछे कारण यह है कि शिंदे के पास दो तिहाई, यानी 37 से ज्यादा विधायकों का समर्थन होने के बावजूद विधानसभा में अलग पार्टी की मान्यता मिलना आसान नहीं है। अगर बागी गुट राष्ट्रपति चुनाव से पहले मसले का हल चाहता है तो उसके पास सबसे आसान रास्ता खुद का किसी दल में विलय करना है। ऐसे में एक बड़ी संभावना मनसे में शामिल होने की ही है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो एकनाथ शिंदे ने इस मसले पर राज ठाकरे से दो बार फोन पर बातचीत भी की है। भले ही कहा जा रहा हो कि शिंदे ने राज ठाकरे की तबीयत जानने के लिए उन्हें फोन किया था, लेकिन इसकी असली वजह यही बताई जा रही है कि शिंदे गुट मनसे में शामिल होकर राज्य में राजनीति के नए समीकरण गढ़ना चाहता है।

गुपचुप मुलाकात में तय हो गया था सब?

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो शिंदे गुट का मनसे में विलय दो दिन पहले देवेंद्र फडणवीस से एकनाथ शिंदे की गुपचुप मुलाकात में ही तय हो गया था। सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में देश के गृहमंत्री अमित शाह भी शामिल हुए थे। यहीं से नई रणनीति पर चर्चा हुई थी। हालांकि, भाजपा अभी भी शिंदे गुट के मनसे में विलय को लेकर संशय में है। इसकी वजह राज ठाकरे के तेवर हैं।

क्यों पड़ रही विलय जरूरत?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भले ही एकनाथ शिंदे के पास शिवसेना के 38 बागी विधायकों का समर्थन हो, लेकिन नई पार्टी के रूप में उनको मान्यता मिलना आसान नहीं है। ऐसे में शिंदे गुट राष्ट्रपति चुनाव से पहले इस मसले को हल करना चाहता है। इसलिए, उसके लिए सबसे आसान यही है कि वह राज ठाकरे की पार्टी मनसे में विलय कर ले। ऐसे में उसके पास ठाकरे नाम भी बचा रहेगा और हिंदुत्व का एजेंडा भी।

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