सोमवार, अक्टूबर 3, 2022
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गलत ऑर्बिट में चले गए दोनों सैटेलाइट्स: इसरो ने कहा-अब किसी काम नहीं आ पाएगा ‘आजादीसैट’

श्रीहरिकोटा। ‘आजादी के अमृत महोत्सव’ के मौके पर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा लॉन्च किए गए सैटलाइट से निराशा हाथ लगी है। ISRO के दोनों सैटेलाइट्स की रविवार को सफल लॉन्चिंग हुई लेकिन सैटेलाइट्स के सेंसर फेल हो गए। इसरो ने बताया कि दोनों सैटेलाइट्स गलत ऑर्बिट में चले गए। अब ये किसी काम के नहीं रहे। इसरो ने सैटेलाइट्स फेलियर की जांच के लिए एक कमेटी भी बना दी है। ISRO ने बताया कि स्मॉल सैटलाइट लॉन्च वीइकल SSLV-D1 अब इस्तेमाल लायक नहीं रह गया है क्योंकि इसे पृथ्वी की सर्कुलर ऑर्बिट की जगह एलिप्टिकल ऑर्बिट में स्थापित कर दिया गया। बताया गया कि सेंसर फेल्योर की वजह से इसने अपनी दिशा बदल दी और यह गलत कक्षा में स्थापित हो गया।

ISRO ने कहा है कि इस बार हुई चूक को अनैलाइज किया जाएगा। इसके बाद सुधार के साथ जल्द ही एसएसएलवी-डी2 लॉन्च किया जाएगा। संगठन की ओर से कहा गया, SSLV-D1 ने सैटलाइट को 356 km X 76km एलिप्टिल ऑर्बिट में प्लेस कर दिया जबकि इसे 356 किमी सर्कुलर ऑर्बिट में स्थापित किया जाना था। अब सैटलाइट इस्तेमाल में नहीं आ सकेगा। इसरो ने कहा कि समस्या की ठीक से पहचान कर ली गई है।

बता दें कि ISRO ने रविवार सुबह 9.18 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC) से अपना पहला नया रॉकेट स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) D1 लॉन्च किया था। इस रॉकेट के साथ आजादीसेट सैटेलाइट्स भेजे गए थे। इसके 75 पेलोड देशभर के 75 ग्रामीण सरकारी स्कूलों के 750 छात्र-छात्राओं ने बनाए थे। डिजाइन करने वाली लड़कियां भी लॉन्च के समय श्रीहरिकोटा में मौजूद रहीं। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में इसकी पूरी तैयारी की गई थी। बताया जा रहा था कि इस मिशन को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी थी क्योंकि इसकी कामयाबी के साथ ही स्मॉल सैटलाइट लॉन्चिंग के लिए दुनियाभर की नजरें भारत की ही तरफ होतीं। हालांकि कुछ गड़बड़ी की वजह से इस बार यह कामयाब नहीं हो पाया।

सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में पहुंचा लेकिन डेटा मिलना बंद हुआ

रॉकेट ने दोनों सैटेलाइट्स को अंतरिक्ष में पहुंचा दिया। लेकिन उसके बाद सैटेलाइट्स से डेटा मिलना बंद हो गया। ISRO प्रमुख एस. सोमनाथ ने कहा कि इसरो मिशन कंट्रोल सेंटर लगातार डेटा लिंक हासिल करने का प्रयास करता रहा। EOS02 एक अर्थ ऑब्जरवेशन सैटेलाइट हैं, जो 10 महीने के लिए अंतरिक्ष में काम करते। इसका वजन 142 किलोग्राम है। इसमें मिड और लॉन्ग वेवलेंथ इंफ्रारेड कैमरा लगा है। इसका रेजोल्यूशन 6 मीटर है। ये रात में भी निगरानी कर सकता है।

क्या थी तैयारी

ISRO का प्लान था कि आजादी की 75वीं सालगिरह के मौके पर 750 छात्राओं का बनाया सैटलाइट लॉन्च किया जाएगा। इसके साथ ही यह अनूठा प्रयोग होगा क्योंकि इसकी लॉन्चिंग स्मॉल सैटलाइट लॉन्च वीइकल से होगी जो कि भविष्य के लिए बहुत ही उपयोगी होगा। 500 किलो तक के उपग्रह लॉन्च करने में यह बड़ी भूमिका निभाएगा। इसरो ने इस बात का आश्वासन दिया है कि इस चूक से वह हार नहीं मानेगा बल्कि जल्द ही एसएसएलवी डी2 की लॉन्चिंग करेगा।

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