रविवार, नवम्बर 27, 2022
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सर्वाइकल कैंसर वैक्सीन: पीरियड्स शुरू होने से पहले हर लड़की के लिए जरूरी

नई दिल्ली। भारतीय महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के बाद सर्वाइकल कैंसर के मामले सबसे ज्यादा मामले पाए जाए हैं। इस बीमारी से पीड़ित अधिकतर महिलाएं एडवांस स्टेज में डॉक्टर के पास आती हैं ऐसे में सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौत का आंकड़ा भी बढ़ जाता है। भारत में हर साल करीब एक लाख से ज्यादा महिलाएं इस बीमारी का शिकार होती हैं, लेकिन अब इस बीमारी से बचा जा सकता है। एचपीवी वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर बीमारी को दूर रख सकती है। भारत में एचपीवी वैक्सीन दो नामों से बिकती है। बाजार में सरवरिक्स की कीमत 3299 रुपए है तो गार्डासिल 2800 रुपए की है।

क्या होता है सर्वाइकल कैंसर?

दिल्ली स्थित वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज में स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सरिता श्यामसुंदर सर्वाइकल कैंसर पर काम कर रही हैं। डाॅ‐ सरिता बताती है कि इस कैंसर का मुख्य कारण वायरस होता है जिसे ह्यूमन पेपिलोमा वायरस कहते हैं जो यौन संबंधों के कारण शरीर में प्रवेश करता है, और अगर बार-बार कोई इस वायरस से संक्रमित होता है तो बाद में जाकर ये सर्वाइकल कैंसर का रूप ले लेता है। लेकिन हर एचपीवी वायरस कैंसर के लिए जिम्मेदार हो, यह जरूरी नहीं। इस वायरस के कई प्रकार होते हैं। उच्च जोखिम वाले वायरस सर्वाइकल कैंसर कर सकते हैं लेकिन इसके लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी निर्भर करती है। अगर इम्यूनिटी मजबूत हो तो इसका जोखिम कम हो सकता है।

एचपीवी 16 और 18 से ही सर्वाइकल कैंसर

डाॅ‐ सरिता बताती है कि सर्वाइकल कैंसर ह्यूमन पैपिलोमा वायरस से फैलता है इसलिए इसे रोकने लिए वैक्सीन लगाई जाती है। यह टीका सभी लड़कियों के लिए यह वैक्सीन जरूरी है। पीरियड्स शुरू होने से पहले यह टीका लड़कियों को लग जाए तो सर्वाइकल कैंसर होने के चांस बहुत कम होते हैं। सभी लड़कियों के लिए यह वैक्सीन जरूरी है। ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) का हर प्रकार सर्वाइकल कैंसर की वजह नहीं बनता। एचपीवी वायरस के 100 प्रकार होते हैं लेकिन 18 ही हाई रिस्क वायरस होते हैं। एचपीवी 16 और 18 ही सर्वाइकल कैंसर का कारण बनता है।

11 से 15 साल की उम्र तक की लड़कियों को वैक्सीन की 2 डोज

इस बीमारी से बचने के लिए किशोर अवस्था में लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन लगाई जाती है। इसे लगाने की सही उम्र 11 से 15 साल है। हर माता-पिता को अपनी बेटी को इसकी डोज लगवानी चाहिए। 1 डोज लगने के बाद दूसरी डोज 6 महीने के बाद लगती है। अगर 15 साल से ज्यादा उम्र हो 3 डोज दी जाती है। एक डोज लगने के बाद दूसरी डोज 1 महीने बाद और तीसरी डोज 6 महीने के बाद लगती है।

कई राज्यों की स्कूलों में छात्राओं को लगाई जा रही मुफ्त वैक्सीन

भारत में राज्य सरकारें अपने स्तर पर स्कूल में लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन लगवा रही हैं। यह मुहिम सबसे पहले नवंबर 2016 में दिल्ली सरकार ने सरकारी स्कूलों में शुरू की। कक्षा 6 की छात्राओं को डोज दी गई। 2016 से 2020 तक 11 से 13 साल की उम्र की 13 हजार लड़कियों को टीका लगाया गया। इसके बाद इस योजना को 2017 में पंजाब और 2018 में सिक्किम में शुरू किया गया।

सेक्शुअली एक्टिव होने से पहले लगवाएं वैक्सीन

एचपीवी वैक्सीन को लगाने का सही समय तब होता है जब लड़की सेक्शुअली एक्टिव ना हो। छोटी उम्र में लड़कियों को पीरियड्स भी शुरू नहीं होते। चूंकि सर्वाइकल कैंसर संबंध बनाने से हो सकता है इसलिए कम उम्र में ही लड़कियों को इसकी डोज दे देनी चाहिए ताकि भविष्य में उन्हें उनके पार्टनर से कोई अनचाहा वायरस ना मिले। अगर मिले भी तो सर्विक्स पर उसका कोई असर ना पड़े।

शादीशुदा महिलाओं को भी लगती है वैक्सीन

शादीशुदा महिलाओं को भी इसकी डोज लगाई जाती है। आमतौर पर हम यह मानकर चलते हैं कि महिला का पूरी जिंदगी एक ही सेक्शुअल पार्टनर होता है। इसलिए उनमें सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इंफेक्शन का रिस्क जीरो होता है। हम उनका कोई टेस्ट नहीं कराते। हम मानकर चलते हैं कि जरूरी नहीं महिला को इंफेक्शन है। या इंफेक्शन है तो जरूरी नहीं, वही वायरस हो। वहीं, अगर वही वायरस हो तो यह वैक्सीन दूसरे संक्रमणों से सुरक्षा देती है।

वैक्सीन लगवाने के बाद भी पैप टेस्ट कराना जरूरी

एचपीवी वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित है। लेकिन इसके बाद भी पैप टेस्ट कराना जरूरी है। इस टेस्ट के जरिए गर्भाशय ग्रीवा की जांच होती है और कैंसर का पता लगाया जाता है।


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