रविवार, नवम्बर 27, 2022
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देहरादून में हुए इस खौफनाक अपराध ने देश को किया था हैरान, पति ने पार की थी हैवानियत की सारी हदें

देहरादून। देहरादून में करीब 11 साल पहले बहुचर्चित अनुपमा गुलाटी हत्याकांड (Anupama Gulati Murder case) ने पूरे देश को हैरान कर दिया था। अनुपमा गुलाटी की लव मैरिज का ऐसा अंजाम हुआ कि हर सुनने और देखने वाले की रुह कांप गई। 2010 में सामने आया बहुचर्चित अनुपमा गुलाटी हत्याकांड (Anupama Gulati Murder) कई माह तक डीप फ्रीजर कांड के नाम से सुर्खियों में रहा। पेशे से एक साफ्टवेयर इंजीनियर राजेश गुलाटी ने झगड़ा होने के बाद अपनी पत्नी अनुपमा को मौत के घाट उतार दिया था।

राजेश ने अनुपमा के साथ 1999 में लव मैरिज की थी। लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि लव मैरिज का ऐसा अंजाम होगा। पुलिस को दिए बयान में हत्या के आरोपी राजेश गुलाटी ने बताया था कि उसने हाॅलीवुड फिल्म की तर्ज पर उसने हत्या प्लान की थी। उसने बताया था कि कोलकाता में उसकी एक और पत्नी है, जिससे उसका एक बच्चा भी है। हत्या से कुछ दिन पहले ही अनुपमा ने राजेश से कुछ रुपयों की मांग की थी। जिसके बाद दोनों में विवाद हो गया था। विवाद इतना बढ़ गया था कि हालीवुड मूवी देखते वक्त राजेश के मन में अनुपमा की हत्या का ख्याल आया।

राजेश ने अनुपमा के शव के किए थे 72 टुकड़े

2010 में अनुपमा गुलाटी का गला घोंट कर मौत के घाट उतारने के बाद राजेश गुलाटी ने निर्ममता से उसके शव के 72 टुकड़े कर दिए थे। राजेश ने पूछताछ में बताया था कि उसने किस तरह इस खौफनाक अपराध को अंजाम दिया था।

डीप फ्रीजर में छिपाए रखे थे शव के टुकड़े

अनुपमा मूलरूप से दिल्ली की रहने वाली थी, जो अपने पति राजेश गुलाटी के साथ देहरादून के कैंट क्षेत्र के प्रकाश नगर में रहती थी। यहीं अनुपमा की हत्या की गई थी। 17 अक्टूबर 2010 को हत्या करने के बाद राजेश ने स्टोन कटर और आरी से शव के 72 टुकड़े किए थे। शव के टुकड़ों को उसने घर के अंदर डीप फ्रीजर में छिपाए रखा।
शव को ठिकाने लगाने के लिए वह रोजाना एक टुकड़ा काली थैली के डालकर ले जाता था और मूसरी रोड पर जंगलों में फेंक देता था। हत्या के बाद उसने अपने अपने व्यवहार में कोई बदलाव नहीं किया। वह रोज की तरह काम पर जाता था। वह अपने दोनों बच्चों को बताता था कि मां दिल्ली गई है और कुछ दिन में आ जाएगी।

राजेश और अनुपमा गुलाटी के दो बच्चे भी उनके साथ ही रहते थे, जबकि अनुपमा का मायका दिल्ली में था। अनुपमा की अक्सर दिल्ली में अपने माता-पिता से बात होती थी। लेकिन 17 अक्टूबर, 2010 के बाद जब उनका अनुपमा से कोई संपर्क नहीं हुआ, जिसके बाद चिंतित माता-पिता ने अनुपमा के भाई सिद्धांत प्रधान को देहरादून भेजा। 11 दिसंबर, 2010 को अनुपमा का भाई अनुपमा के घर पहुंचा। लेकिन राजेश ने उसे घर में तक नहीं घुसने दिया। इसके बाद सिद्धांत ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस जब मौके पर पहुंची तो उनके होश उड़ गए। घर में डीप फ्रीजर से अनुपमा गुलाटी की लाश के टुकड़े मिले। जिसके बाद पुलिस ने राजेश गुलाटी को गिरफ्तार कर लिया। देहरादून के बहुचर्चित हत्याकांड में सात साल बाद राजेश गुलाटी को दोषी करार किए जाने के बाद उम्रकैद की सजा सुनाई।

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