रविवार, नवम्बर 27, 2022
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China-Taiwan News : चीन-ताइवान के बीच युद्ध के आसार! ड्रैगन ने 6 जोन में शुरू किया सैन्य अभ्यास

बीजिंग/ताइपे। चीन और ताइवान के बीच विवाद बढ़ता ही जा रहा है। अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पेलोसी की ताइवान से लौटते ही चीन और एग्रेसिव हो गया है। चीन ने ताइवान को घेरने के लिए उसकी सीमा के आसपास घेराबंदी शुरू कर दी है। खबर यह भी है कि गुरुवार को चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने ताइवान के ईदगिर्द 6 इलाकों में सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने ताइवान की सीमा पर युद्धाभ्यास के लिए युद्धपोत, फाइटर जेट व मिसाइलों को तैनात किया है। आधिकारिक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएलए चार से सात अगस्त तक छह अलग-अलग क्षेत्रों में भी सैन्य अभ्यास करेगा, जो ताइवान द्वीप को सभी दिशाओं से घेरता है।

चीन ने इस मिलिट्री एक्सरसाइज को ‘लाइव फाइरिंग’ नाम दिया है। चीन के सरकारी मीडिया के मुताबिक, यह मिलिट्री ड्रिल ताइवानी तट से सिर्फ 16 किमी दूर की जा रही है। इसमें असली हथियारों और गोला-बारूद का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह एक्सरसाइज 7 अगस्त चलेगी। चीन पहले यह ड्रिल ताइवान से करीब 100 किमी दूर करता था। लेकिन नैंसी के दौरे के बाद अब बेहद नजदीक पहुंच गया है।

चीन ने नैंसी की यात्रा का किया था विरोध

दरअसल, अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पेलोसी चीन के विरोध के बावजूद मंगलवार को ताइवान की राजधानी ताईपेई पहुंचीं थीं। 25 साल बाद ये पहली बार है जब अमेरिकी स्पीकर ताइवान के दौरे पर थीं। इससे पहले 1997 में उस समय के स्पीकर न्यूट गिंगरिक यहां पहुंचे थे। पेलोसी के दौरे से बौखलाए चीन ने तमाम एलान कर डाले। इसके अलावा चीन के फाइटर जेट ताइवान की सीमा के ऊपर उड़ान भरते नजर आए। पेलोसी के ताइवान से रवाना होते ही 27 चीनी लड़ाकू विमान ताइवान के हवाई क्षेत्र में पहुंचे।

क्या है चीन-ताइवान के बीच विवाद?

ताइवान दक्षिण पूर्वी चीन के तट से करीब 100 मील दूर स्थिति एक द्वीप है। ताइवान खुद को संप्रभु राष्ट्र मानता है। उसका अपना संविधान है। ताइवान में लोगों द्वारा चुनी हुई सरकार है। वहीं चीन की कम्युनिस्ट सरकार ताइवान को अपने देश का हिस्सा बताती है। चीन इस द्वीप को फिर से अपने नियंत्रण में लेना चाहता है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ताइवान और चीन के पुन: एकीकरण की जोरदार वकालत करते हैं। ऐतिहासिक रूप से से देखें तो ताइवान कभी चीन का ही हिस्सा था।

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