शुक्रवार, दिसम्बर 9, 2022
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Artificial CloudBurst Technology : क्या चीन की साजिश से भारत में फट रहे बादल: 30 बार हुआ ऐसा! तेलंगाना CM के बयान से खलबली

नई दिल्ली। तेलंगाना और आसपास के राज्यों में भारी बारिश की वजह से गोदावरी नदी कई जिलों में तबाही मचा रही है। इस बीच तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने भारत में बादल फटने की घटनाओं के पीछे विदेशी ताकतों की साजिश बताई है। पहले भी उन्होंने लेह-लद्दाख और उत्तराखंड में यही किया था। चंद्रशेखर राव ने कहा कि गोदावरी इलाके में बाढ़ की बड़ी वजह बादल फटना है। मुख्यमंत्री 17 जुलाई को बाढ़ प्रभावित भद्राचलम के दौरे पर गए थे। चंद्रशेखर राव के इस बयान के बाद चर्चाओं का दौर शुरू हो गया कि क्या ऐसा वाकई में हो सकता है। हालांकि यह कोई काल्पनिक बात नहीं हो सकती है क्योंकि पहले भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब कृत्रिम रूप से बारिश करवाई गई हो।

दरअसल, तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव ने यह बयान तब दिया है जब वे हाल ही में राज्य में बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरान करने निकले थे। उन्होंने कहा कि ‘ये एक नई घटना है, जिसे बादल फटना कहते हैं। लोग कहते हैं कि इसमें कुछ साजिश है, हम नहीं जानते कि ये कितना सच है, कहा जाता है कि विदेशी जानबूझकर हमारे देश में कुछ जगहों पर बादल फटने की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। लेह-लद्दाख और उत्तराखंड में भी पहले वे ऐसा कर चुके हैं।’ हालांकि उन्हें अपने बयान के बाद आलोचना झेलनी पड़ रही है। भाजपा नेता कोंडा विश्वेश्वर रेड्डी ने तो यहां तक कह दिया कि अगर चीन या पाकिस्तान ने ऐसा किया है तो उन्हें केसीआर ने एक गुप्त हवाई अड्डा भी मुहैया कराया होगा।

क्या होता है बादल फटना

छोटे से इलाके में बहुत कम समय में बहुत ज्यादा बारिश होने को बादल फटना कहते हैं। इसमें इतनी तेज होती है जैसे बहुत सारे पानी से भरी एक बहुत बड़ी पॉलीथिन आसमान में फट गई हो। इसलिए इसे हिंदी में बादल फटना और अंग्रेजी में cloudburst कहते हैं। आधिकारिक तौर पर इसका पैमाना 20 से 30 वर्ग किलोमीटर के इलाके में एक घंटे से कम समय में 100mm या उससे ज्यादा बारिश होना।

कहीं भारत में बाढ़ आने के पीछे चीन की साजिश तो नहीं?

एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1970 से 2016 यानी इन 46 सालों में देश में बादल फटने की 30 से ज्यादा घटनाएं हुईं। ये सभी घटनाएं हिमालय के क्षेत्र में हुईं। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और अरुणाचल प्रदेश में बादल फटने के बाद भारी बारिश से कई बार बाढ़ आ चुकी है।

हाल ही में 8 जुलाई 2022 को जम्मू-कश्मीर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा के पास बादल फटने से आई बाढ़ में 16 लोगों की मौत हो गई, जबकि 40 अभी भी लापता हैं। वहीं 2013 में उत्तराखंड में बादल फटने के कारण अचानक आई बाढ़ से केदारनाथ में आपदा आई थी। इस दौरान 5 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। वहीं असम में हर साल बारिश और बाढ़ से सैकड़ों लोगों की मौत हो जाती है।

चूंकि बादल फटने की ज्यादातर घटनाएं भारत-चीन के बॉर्डर वाले इलाकों में होती हैं। ऐसे में इसके पीछे चीन की साजिश होने की आशंका जताई जा रही है। चीन और भारत के बीच कई सालों से सीमा विवाद चल रहा है। चीनी सेना समय-समय पर बॉर्डर पर उकसाने वाली कार्रवाई करती रहती है। ऐसे में कई लोग संदेह जता रहे हैं कि चीन बादल फटने की साजिश रच रहा है और बारिश और बाढ़ से भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।

बीजिंग ओलंपिक के दौरान खूब हुई थी इसकी चर्चा

वैसे तो बादल फटने का इतिहास और भी पुराना है लेकिन हाल के दशकों में यह मामला उस समय चर्चित हुआ जब चीन की राजधानी में ओलिंपिक चल रहा था और मौसम विभाग ने मैच के दिन बारिश की आशंका जाहिर की। इससे बचने के लिए चीन ने मैच के एक दिन पहले ही कृत्रिम बारिश करवा ली थी। इसके लिए एक दिन पहले ही बादल फटने का इंतजाम किया गया और अगले दिन बारिश नहीं हुई।

चंद्रशेखर राव के बयान के मायने

बादल फटने को लेकर एक तथ्य यह भी है कि ज्यादातर घटनाएं भारत-चीन के बॉर्डर वाले इलाकों में होती हैं। लेकिन यह हिमालय के आसपास वाले इलाके में ही ज्यादा होती है। चंद्रशेखर राव के बयान के मुताबिक इस बार बादल फटने के पीछे चीन या पाकिस्तान की साजिश हो सकती है। फिलहाल एक्सपर्ट्स अभी इसे सच मानने से कतरा रहे हैं लेकिन उनके बयान ने एक नई बहस को मौका जरूर दे दिया है।

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