रविवार, नवम्बर 27, 2022
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Plastic Ban: देश में आज से सिंगल यूज प्लास्टिक पर पाबंदी, झंडे, कैंडी व गुब्बारे सहित 19 उत्पाद पर लागू होगा नियम

नई दिल्ली। देश में 1 जुलाई से सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुओं (Single Use Plastic Items) के उत्पादन, बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लग जाएगा। भारत सरकार एक जुलाई यानी कल से सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने जा रही है। इससे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर सीधा असर पड़ेगा। सरकार पहले ही यह निर्देश दे चुकी है कि 30 जून 2022 से पहले स्टाक खत्म कर दिया जाए। प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम के तहत सिंग यूज प्लास्टिक की कुल 19 वस्तुओं पर प्रतिबंध लगेगा। इनमें थर्माकोल से बनी प्लेट, कप, गिलास, कटलरी जैसे कांटे, चम्मच, चाकू, पुआल, ट्रे, मिठाई के बक्सों पर लपेटी जाने वाली फिल्म, निमंत्रण कार्ड, सिगरेट पैकेट की फिल्म, प्लास्टिक के झंडे, गुब्बारे की छड़ें और आइसक्रीम पर लगने वाली स्टिक, क्रीम, कैंडी स्टिक और 100 माइक्रोन से कम के बैनर शामिल हैं।

वहीं, व्यापारी संघ कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध को एक साल टालने की मांग की है। कैट ने पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव को पत्र लिखकर कहा है कि इस संबंध में एक समिति बनाई जाए जिसमें सरकारी अधिकारी और हितधारकों के प्रतिनिधि होंगे और वे मिलकर सिंगल यूज प्लास्टिक का विकल्प ढूंढेंगे।

अगस्त 2021 में अधिसूचित नियम और 2022 के दौरान सिंगल यूज प्लास्टिक को चरणबद्ध रूप से समाप्त करने के भारत के प्रयासों के तहत 31 दिसंबर, 2022 तक प्लास्टिक कैरी बैग की न्यूनतम मोटाई को मौजूदा 75 माइक्रोन से 120 माइक्रोन में बदल दिया जाएगा। मोटे कैरी बैग सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को समाप्त करने के उद्देश्य से लाए जाएंगे। मंत्रालय ने कहा कि प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाएंगे और अधिकारियों की टीम को प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक वस्तुओं के अवैध उत्पादन, आयात, वितरण, बिक्री रोकने का काम सौंपा जाएगा।

जानिए इससे जुड़े कुछ अहम तथ्य

सिक्किम पहला राज्य है जिसने 1998 में सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया।
सरकार ने प्लास्टिक बैग की मोटाई के लिए एक मानक तय किया है और खुदरा विक्रेताओं द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले बैग के लिए शुल्क अनिवार्य कर दिया।
प्लास्टिक प्रदूषण रोकने के लिए सार्वजनिक स्थलों, राष्ट्रीय संपदाओं, जंगलों और समुद्री तटों पर साफ-सफाई अभियान शुरू किए गए हैं। पूरे देश में करीब 100 स्मारकों को शामिल किया गया है।
सड़क निर्माण में प्लास्टिक का उपयोग करना शुरू किया गया।
पर्यावरण और पारिस्थितिकी विकास सोसायटी ने दिल्ली में प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए ‘बीट प्लास्टिक प्रदूषण’ नाम दिया गया।

केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण और केंद्रीय लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्यम मंत्रालय छोटी औद्योगिक इकाइयों को प्रतिबंधित सिंग यूज प्लास्टिक वस्तुओं के विकल्प के उत्पादन के लिए तकनीकी सहायता देंगे। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लगभग चार साल पहले अनुमान लगाया था कि भारत प्रतिदिन लगभग 9,200 मीट्रिक टन प्लास्टिक कचरा उत्पन्न करता है, या एक वर्ष में 3.3 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक। उद्योग के एक वर्ग ने दावा किया है कि देश में लगभग 70% प्लास्टिक कचरे को रिसायकल किया जाता है।

भारत में सिंगल यूज प्लास्टिक

सालाना 2.4 लाख टन प्लास्टिक का उत्पादन होता है।
भारत में18 ग्राम प्रति व्यक्ति खपत है।
वैश्विक स्तर पर 28 ग्राम प्रति व्यक्ति खपत है।
60 हजार करोड़ रुपये का प्लास्टिक उद्योग है।
इसके निर्माण में 88 हजार इकाइयां लगी हैं।
प्लास्टिक उद्योग से 10 लाख लोग जुड़े हैं।
सालाना एक्सपोर्ट 25 हजार करोड़ रुपये।

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