रविवार, नवम्बर 27, 2022
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Amer Fort History – राजस्थान की आन-बान और शान – आमेर के ऐतिहासिक किले के बारे में अनसुनी बातें क्या आप जानते हैं

राजस्थान की राजधानी जयपुर की शान और एक ऐतिहासिक स्थल के रूप मे अरावली की पहाड़ी पर बना राजशाही महल आमेर स्थित है. जयपुर का ये किला बर्तमान समय में पर्यटकों के लिए वास्तुकला का एक नायब नमूना है. देश और दुनिया में आमेर का किला इतना प्रसिद्ध है की इसे देखने के लिए रोजाना हजारों की संख्या में पर्यटक यहाँ आते है. इस किले का निर्माण राजधानी (Jaipur) जयपुर से मात्र 11 किलोमीटर की दुरी पर 1592 में राजा मान सिंह ने करवाया था, इस किले के निर्माण में गुलाबी और पीले बलुआ पत्थरों का प्रयोग किया गया था. चांदनी रात में ये किला सोने की तरह चमकता है जिसे देखने के लिए यात्री शाम को यहाँ रुकते है. इस किले की वास्तुकला देखने लायक है, अगर आप भी यहाँ आना चाहते है तो यहाँ आकर इस किले के बारे में नजदीक से जानकारी ले सकते है.

Amer Fort in Hindi
Amer Fort in Jaipur

आमेर के किले के इतिहास (Amer History) के बारे में कहा जाता है की कछवाहो के शासन से पहले ये एक छोटा सा शहर हुआ करता था, जिसे मीनास नाम से प्रसिद्ध एक जनजाति ने बसाया था. बाद में इस किले का नाम भगवान् शिव के नाम अबिकेश्वर के नाम पर आमेर हुआ. लेकिन यहाँ के स्थानीय लोगो का मानना है की दुर्गा देवी के नाम पर इसका नाम आमेर पड़ा है. प्राचीन समय में इस शहर पर कछवाहो का राज रहा था. इसके बाद इस पर राजा मान सिंह का शासन हो गया जिसके बाद लगभग 150 वर्षो तक इस पर उसके बाद आने वाले राजाओं ने राज किया, और समय-समय पर इस किले का विस्तार करते रहे. लगातार आती कई बड़ी बाधाओं का सामना करते हुए आज भी ये किला शान से अपने इतिहास को समेटे हुआ है. महल के अन्दर राजा मान सिंह ने उनकी संरक्षक देवी शीतला माता का एक छोटा मंदिर भी बना रखा है.

इस किले का निर्माण पारंपरिक हिन्दू और राजसी राजपुताना शैली में किया गया था, इसके निर्माण में संगमरमर और लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग किया गया था. किले के अन्दर आज भी हमें प्राचीन शिकार शैली और महत्वपूर्ण राजपूत राजाओं के चित्र देखने को मिल जायेंगे. इस किले का निर्माण चार भागों में किया गया है, जिसके प्रत्येक भाग का अपना अलग प्रवेश द्वार और प्रांगन है. किले के मुख्य द्वार को सूरज पोल या सूर्य द्वार के नाम से जाना जाता है, जोकि मुख्य प्रांगन की ओर जाता है. इस प्रवेश द्वार का नाम सूर्य के पूर्व में उगने के कारण इसकी स्थिति पर पड़ा है. इस किले के प्रांगन में बने जलेब चौक तक पहुचने के लिए सीढियों की सहायता से जाया जा सकता है, जो की यहाँ बने सीतला माता के मंदिर तक जाती है.

आमेर के इस किले को राजधानी जयपुर का आभूषण भी कहा जाता है, क्यों की इसकी वास्तुकला, और समृद्ध इतिहास दुनिया भर में प्रसिद्ध है. इस किले से जुडी घटनाओं और तथ्यों का आज भी स्पष्ट नही किया गया है, जो की आज भी रहस्य बनी हुई है. ऐसा कहा जाता है की राजा मान सिंह ने यहाँ पर अपना खजाना छुपा रखा है लेकिन आज तक इसकी कोई प्रमाणिक पुष्टि नहीं हो सकी है.

इसके निर्माण को लेकर भी एक रहस्यमयी तथ्य सामने आता है, जिसके लिए इतिहासकारों ने कहा है की इसका निर्माण लगभग 100 वर्ष की लम्बी अवधि में हुआ था. इसके अतिरिक्त भी महल से जुड़े और भी कई अनसुलझे रहस्य है.

किले के अन्दर आम लोगो के लिए एक हॉल भी बना हुआ है जो की महल का दूसरा स्तर है, और ये तीनो तरफ से खुला हुआ है.

यह हॉल को मोजेक ग्लासवर्क से सजाया गया है जो की हाथियों के साथ दो स्तंभों पर खड़ा हुआ है. इसके सामने सुख निवास बना हुआ है जिसके दरवाजों को हाथी के दांतों से सुशोभित किया गया है, सुख निवास में राजा खाली समय में रानियों के साथ समय बिताते थे, इस वजह से इसका नाम सुख निवास रखा गया.

महल के अन्दर स्थित शीश महल यहाँ का प्रमुख आकर्षण का केंद्र है, जो दर्पणों से मिलकर बनाया गया है. शीश महल के निर्माण में इस बात का प्रमुखता से ध्यान रखा गया की सूर्य की थोड़ी सी किरणों से ही यह महल पूरा चमक जाए. इसके बारे में कहा जाता है की इसको प्रकाशित करने के लिए केवल एक मोमबत्ती ही काफी होती थी. आमेर किले में जयपुर के सम्रद्ध इतिहास, परम्परा और संस्कृति को फिर से पुनर्जीवित करने के उदेश्य से हर शाम को यहाँ पर एक पचास मिनट का लाइट एंड साउंड शो का आयोजन किया जाता है.

TPV News Desk
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