बुधवार, अगस्त 10, 2022
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अमरनाथ में बादल फटने की तबाही: 12 वर्षों में तीन बार बादल फटने की घटनाएं, लेकिन पहली बार दिखा ऐसा दर्दनाक मंजर

जम्मू। अमरनाथ गुफा के पास शुक्रवार शाम करीब साढ़े 5 बजे बादल फट गया। इससे कैंप के बीच से अचानक सैलाब आ गया। आपदा के दौरान गुफा के पास 10-15 हजार श्रद्धालु मौजूद थे। कई लोग टेंट के साथ बह गए। इनमें से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, प्रभावित क्षेत्र में अभी भी 35 से 40 श्रद्धालुओं के फंसे होने की खबर है। बादल फटने की घटना पवित्र गुफा के एक से दो किलोमीटर के दायरे में हुई। सेना के जवान, जम्मू-कश्मीर पुलिस, NDRF, ADRF, ITBP के जवान प्रभावित क्षेत्र में फंसे लोगों को रेस्क्यू करने में जुटे हैं।

गुफा के पास पिछले 12 वर्षों में तीन बार अमरनाथ यात्रा के दौरान बादल फटने की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन कभी भी इतनी तबाही नहीं हुई। ऐसा पहली बार हुआ है कि बादल फटने से इतने लोगों की जान चली गई और अब भी कई लापता हैं। अमरनाथ यात्रा में तैनात कुछ अफसरों ने बताया कि सब कुछ सामान्य चल रहा था। एकदम से एक आवाज आई और इतनी तबाही मच गई। जानकारी के अनुसार, साल 2010 में भी गुफा के पास बादल फटा था, लेकिन तब भी कोई नुकसान नहीं हुआ था। वर्ष 2021 में 28 जुलाई को गुफा के पास बादल फटने से तीन लोग इसमें फंस गए, जिन्हें बचा लिया गया था। इसमें कोई जानी नुकसान नहीं हुआ था। इस बार बादल फटने से बड़ा नुकसान हुआ है। यात्रा में तैनात कुछ अफसरों ने बताया कि बादल फटने के बाद एकदम से पानी का बहाव आया। इसमें दो बड़े पहाड़ों का मलबा आ गया। मलबे में कई बड़े बड़े पत्थर थे, जिनकी वजह से इनकी चपेट में कई यात्री आ गए। यह एक मुख्य कारण था कि इतने लोगों की जान चली गई।

अमरनाथ गुफा के पास फटे बादल से एक घंटे के भीतर इतनी बारिश हो गई, जितनी पांच घंटों में भी नहीं होती। यही नहीं गुफा के आसपास के कैंपों में भी बारिश नहीं हुई, लेकिन गुफा के ऊपर भारी बारिश हुई। इस बीच बादल फट गया और तबाही मच गई। मौसम विभाग के निदेशक सोनम लोटस का कहना है कि शाम पांच बजे से लेकर छह बजे के बीच गुफा के ऊपरी हिस्से में 25 एमएम बारिश हो गई, जबकि इसके पहले दोपहर 12 से बजे से लेकर शाम पांच तक मात्र 30 एमएम बारिश हुई थी। इससे कई गुणा ज्यादा बारिश पांच जुलाई को हुई थी।

गुफा के ऊपर एकदम से बारिश हो गई। इसके बाद यह सैलाब बनकर नीचे आ गई। जिसके साथ बड़े पत्थर और मलबा आया और इसकी वजह से कई लोगों की जान चली गई। उन्होंने कहा, गुफा के आसपास कई कैंप हैं। पंचतरणी, शेषनाग और बालटाल जैसे कैंपों में भी इतनी बारिश नहीं हुई है। यहां तक कि बारिश हुई ही नहीं। गुफा के ऊपर एकदम से इस तरह की बारिश होना और इतनी तबाही होना काफी दुखद है। अमरनाथ गुफा के पास बादल फटने से उपजे हालात के चलते पुलवामा, कुलगाम, शोपियां और अनंतनाग जिलों से अतिरिक्त डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ दवाओं और इमरजेंसी किट के साथ भेजने को कहा है।

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