शुक्रवार, सितम्बर 30, 2022
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70 साल की महिला ने बेटे को दिया जन्म: 75 साल में पहली बार बना पिता, डॉक्टर का दावा-राजस्थान में पहला मामला

अलवर। राजस्थान में अजीबोगरीब मामला सामने आया है। एक महिला ने 70 साल बाद बच्चे को जन्म दिया है। आप शायद इस बात पर यकीन ना करें लेकिन ये सच है। राजस्थान के अलवर में सोमवार को शादी के करीब 54 साल बाद घर में आई खुशियां आई हैं। दोनों को पहली संतान हुई है। इसमें मां की उम्र 70 और पिता की उम्र 75 साल है। वहीं डॉक्टरों ने का दावा है कि राजस्थान में यह अकेला मामला है कि इतनी उम्र की महिला ने बेटे को जन्म दिया है। हालांकि, आईवीएफ तकनीक से देश-दुनिया में पहले भी कई बुजुर्ग दंपती 70-80 साल की उम्र में भी माता-पिता बन चुके हैं। वहीं पिता बने गोपीचंद को पहली संतान की खुशी कैसे जाहिर करें, समझ नहीं पा रहे हैं।

शादी के 54 साल बाद पति-पत्नी बने माता-पिता

बच्चे के पिता गोपीचंद पूर्व सैनिक हैं। बांग्लादेश युद्ध के दौरान याद पैर में गोली लगी थी। गोपीचंद का कहना है कि अब बेटा होने के बाद उन्हें काफी खुशी है। गोपीचंद का कहना है, ‘अब वे भी दुनिया में सबके बराबर हो गए। अब कुनबा भी आगे बढ़ सकेगा। चंद्रवती की आंखों से तो बार-बार खुशी के आंसू निकल आते हैं।’ गोपीचंद ने बताया कि वे अपने पिता नैनू सिंह के इकलौते बेटे हैं। गोपीचंद की शादी 1968 में चंद्रावती से हुई, लेकिन काफी प्रयासों के बावजूद भी बच्चा नहीं हुआ। इसके बाद वह सेना से रिटायर हो गए। पत्नी का जगह-जगह इलाज करवाया। लेकिन कोई फायदा नही मिला। जिसके बाद उन्होंने अलवर में एक आईवीएफ सेंटर से अपनी पत्नी का ट्रीटमेंट करवाया। चंद्रवती भी इस उम्र में मां बनने के बाद खुद को बेहद खुश नसीब महसूस कर रही है। बच्चे का वजन करीब पौने 3 किलो है। वहीं IVF (इन विट्रो फर्टिलाइजेशनॉ) एक्सपर्ट डॉ. पंकज गुप्ता कहते हैं, ‘देशभर में इस उम्र में बच्चे पैदा होने के गिने-चुने ही केस हैं। राजस्थान का शायद यह पहला केस है। जब 75 साल के पुरुष व 70 साल की महिला को संतान प्राप्ति हुई है।’

IVF प्रक्रिया के जरिए बच्चे ने जन्म लिया

25 जुलाई 1978 को पहला टेस्ट ट्यूब बेबी इंग्लैंड में पैदा हुआ था। इसे इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) को पहले टेस्ट ट्यूब बेबी के नाम से जाना जाता था। यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है। इस ट्रीटमेंट में महिला के अंडों और पुरुष के शुक्राणुओं को मिलाया जाता है। जब भ्रूण बन जाता है, तब उसे महिला के गर्भ में रख दिया जाता है। यह प्रक्रिया काफी जटिल और महंगी है, लेकिन यह उन लोगों के लिए वरदान है, जो कई साल से गर्भधारण की कोशिश कर रहे हैं। इसमें ओवेरियन स्टिमुलेशन, महिला की ओवरी से एग निकालना, पुरूष से स्पर्म लेना, फर्टिलाइजेशन और महिला के गर्भ में भ्रूण को रखना शामिल हैं। IVF के एक साइकल में दो से तीन सप्ताह लग सकते हैं। चंद्रवती के साथ प्रक्रिया करीब 9 महीने पहले की गई थी। गर्भ काल पूरा करने के बाद चंद्रवती को 2 किलो 750 ग्राम का बच्चा पैदा हुआ।

50 साल से ज्यादा उम्र की महिला अब टेस्ट ट्यूब बेबी से नहीं बन सकेंगी मां

टेस्ट ट्यूब बेबी को लेकर अब सरकार ने ART (असिस्टेड रीप्रोडेक्टिव टेक्नीक) कानून बना दिया है। यह कानून जून 2022 से लागू हो गया है। इस कानून के तहत 50 साल से अधिक उम्र की महिलाएं टेस्ट ट्यूब तकनीक से मां नहीं बन सकेंगी। मतलब टेस्ट ट्यूब बेबी के लिए महिला की उम्र 50 साल से कम होनी चाहिए, लेकिन यह केस कानून बनने से पहले का है। इसलिए इनको 70 साल की उम्र में बच्चा मिला है।

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